अजय दीक्षित
ईरान युद्ध जिस तरह लड़ा गया और सीजफायर हुआ इससे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में कूटनीतिक रूप से व्यापक प्रभाव पडऩे वाली है और भारत की कूटनीतिक मुश्किल दरवाजे पर खड़ी है। विशेषकर तब जब अमेरिका ईरान युद्ध की मध्यस्थता भारत धुर विरोधी देश पाकिस्तान ,तुर्की, मिश्र जैसे देश कर रहे हैं।
भारत अब तक मध्य पूर्व में इजरायल को अगुआ बना कर अपनी प्राथमिकता तय करता था।इस युद्ध के बाद ईरान के मुस्लिम देशों का नेता बनने का माहौल बन रहा है जिससे गैर मुस्लिम देश भारत और इजरायल को नई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।हो सकता है कि इसराइल इस युद्ध के सीजफायर को माने ही नहीं क्योंकि वह लेबनान पर हमला जारी रखेगा। यूएस प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की ओर से इसराइल पर यह बाध्यता नहीं होगी कि वह हिज्बुल्लाह, हमास हुती पर हमला न करें। और अगर हमले जारी रहेंगे तो ईरान अब खुले तौर पर इसराइल से युद्ध करेगा । चाइना और रूस अब उसका साथ खुले तौर पर देंगे। अमेरिका तो युद्ध से एग्जिट हो गया क्योंकि उसे यही करना था ।जेडी वेंस, तुलसी गैबार्ड, रक्षा मंत्री, रोबियो,सब ने दबाब बनाया कि इसराइल ने इस युद्ध में अमेरिका को उलझा दिया। सीनेट, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भी यही मनसा थी । बढ़ी चतुराई से अमेरिका सम्मानजनक तरीके से एग्जिट हुआ । इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर खान, और प्रधानमंत्री मंत्री शहवाज शरीफ ने मौजतफा खामनाई को समझा दिया कि अभी सीजफायर कर लो ।
इजरायल इस सीजफायर के खिलाफ था।अब होगा यह कि मुस्लिम देशों, पाकिस्तान, तुर्की, मिश्र, ईरान, इराक, कतर, बहरीन, सऊदी अरब, यूएई कुवैत, इसराइल पर दबाव बनाएंगे कि पालिस्टिन,गाजा,की कब्जाई गई जमीन वापिस करे अन्यथा
कारवाही के लिए तैयार रहे । इसराइल अब बहुत बड़े संकट में इसलिए फंस गया है कि उसके चारों ओर मुस्लिम देश है।
हिज्बुल्लाह, हमास, हुती सक्रिय हो सकते हैं और उन्हें बेहिसाब मदद ईरान और मुस्लिम देश करेंगे। इसराइल का गॉडफादर अमेरिका अब कतई मदद नहीं करेगा। आगे चल कर इसराइल का अस्तित्व समाप्त करने की कोशिश करेंगे
मुस्लिम देश।
भारत के लिए संकट यह है कि लश्कर ए तोयबा, सक्रिय हो कर पाकिस्तान की शह पर कश्मीर में उग्रवादी गतिविधियों को बड़ा सकते हैं। स्व अयातुल्ला खुमानी ने कश्मीरी लोगों
के लिए हमदर्दी जताई थी ईरान की नई लीडरशिप भी यही बात आगे बढ़ाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष एक ओर खाड़ी देशों और ईरान से आने वाला तेल है जो अर्थ व्यवस्था के लिए जरूरी है दूसरी ओर कश्मीर जो बीजेपी के लिए नाक का प्रश्न है।
हो सकता है कि ओ आई सी कश्मीर के संबंध कोई प्रस्ताव पारित करे और पाकिस्तान, तुर्की, अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर उठाए। हालांकि भारत अकेला भी पड़ जाय तब भी कोई देश कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि भारत परमाणु सकती भी है और संपन्न देश भी है। भारत के पक्ष में एक तथ्य यह भी है कि भारत के पाकिस्तान को छोड़कर सभी मुस्लिम देशों से संबंध ठीक है । जिसमें ईरान से संबंध बहुत ही बेहतर है क्योंकि ईरान मुस्लिम देशों अकेला गैर सुन्नी मुस्लिम देश है।यहां पर शिया मुस्लिम रहते हैं। शिया मौलवी सैयद अलिफ जैदी कहते हैं कि ईरान भारत का पंडित जवाहरलाल नेहरू के जमाने से फिर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी तक मित्र राष्ट्र रहा है क्योंकि भारत ने हमेशा पालिस्टिन,का यासिर अराफात के जमाने से समर्थन किया।
लेकिन कुछ सालों हमारे इसराइल से भी अच्छे संबंध रहे है।
भारत रहने वाले शिया मुस्लिम का भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा है। स्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई को लखनऊ खूब समर्थन मिलता था।
अमेरिका की स्थिति अब इसी है वह युद्ध का नाम नहीं लेगा।
और न ही साल दो साल फटे में पैर आडा ये गा ।
पाकिस्तान रणनीतिक रूप से इस समय बढ़त हासिल किए हैं क्योंकि उसे तेल उधार मिलता रहेगा। दूसरे उसे अमेरिका से हथियार मिल जाएगा।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

