नई दिल्ली 12 April, (rns) । ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की अगुवाई पाकिस्तान द्वारा करने पर भारत में सियासत गरमा गई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने पार्टी के अखबार ‘सामना’ में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने वसीम बरेलवी के शेर, कोई टूटी सी कश्ती ही, बगावत पर उतर आए, तो कुछ दिन ये तूफां, सर उठाना भूल जाते हैं।” संजय राउत ने लिखा, वसीम बरेलवी का यह शेर ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया था, जो वर्तमान स्थिति में काफी सटीक है। खुद को वैश्विक महाशक्ति समझने वाले अमेरिका को ईरान जैसे एक सामान्य देश ने कैसे सबक सिखाया, यह पूरी दुनिया देख रही है। ईरान का संघर्ष वहां की राष्ट्राभिमानी जनता का विद्रोह था। जब ट्रंप ने एक ही रात में ईरान की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करने की धमकी दी, तब ईरान की लाखों जनता अपनी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए मानव शृंखला बनाकर सड़कों पर उतर आई। ईरान की डेढ़ करोड़ जनता बलिदान के लिए तैयार है, ऐसा उनके विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा और ट्रंप को ‘शांति’ वार्ता के लिए मेज पर घसीट लाए लेकिन यह ‘मेज’ इस्लामाबाद में है, जो दुनिया में आतंकवादियों का प्रमुख केंद्र है।” संजय राउत ने आगे लिखा, “अमेरिका पर इतिहास का सबसे भयानक आतंकवादी हमला करने वाला ‘लादेन’ पाकिस्तान के आश्रय में था और अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारा था। भारत में आतंकवादी हमले करने वाले सभी मोहरे पाकिस्तान की शरण में हैं। वही पाकिस्तान अब ईरान-अमेरिका युद्ध में ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका ने उसे शांतिदूत के रूप में मान्यता दे दी है।
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