वाशिंगटन,12 अपै्रल। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक लेख साझा किया है, जिसमें वार्ता सफल न होने की स्थिति में ईरान के खिलाफ संभावित कदमों की जानकारी दी गई है। इस लेख में सुझाव दिया गया है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता, तो अमेरिका उस पर समुद्री नाकेबंदी लगा सकता है।
ट्रंप द्वारा साझा किए गए लेख में लिखा है, अगर ईरान अमेरिकी समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो ट्रंप वादे के मुताबिक तेहरान पर बमबारी करके उसे पाषाण युग में वापस भेज सकते हैं। या फिर वे सफल नाकाबंदी रणनीति को दोहरा सकते हैं, जिससे पहले से ही लडख़ड़ाती ईरानी अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया जा सके और चीन और भारत को उनके प्रमुख तेल स्रोतों में से एक से वंचित कर उन पर राजनयिक दबाव बढ़ाया जा सके।
लेख में लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट के हवाले से कहा गया है, अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर पूर्ण नियंत्रण रखना आसान होगा। अगर ईरान अडिय़ल रवैया अपनाता है, तो अमेरिकी नौसेना व्यापक निगरानी प्रणाली स्थापित कर सकती है और होर्मुज से आने-जाने वाली चीजों पर नजर रख सकती है। अगर आप खार्ग द्वीप या ओमान के पास संकरे हिस्से से आगे बढऩा चाहते हैं तो आपको अमेरिका से अनुमति लेनी होगी।
ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने से पहले भी इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। इसके तहत, वेनेजुएला से आने-जाने वाले जहाजों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। यहां तक कि शैडो जहाजों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। अमेरिका ने वेनेजुएला से कच्चा तेल ला रहे एक विवादित जहाज का पीछा भी किया था। इन प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल आधारित अर्थव्यवस्था लगभग बर्बाद हो गई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। वहीं, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका युद्ध में जो कुछ भी हासिल नहीं कर सका, वो सब वार्ता में मांग रहा था।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

