रांची 12 अप्रैल (आरएनएस)। शहर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के अद्भुत वातावरण से सराबोर नजर आया, जब दिगंबर जैन भवन में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में विश्व नवकार मंत्र दिवस के संदेश के साथ विश्व कल्याण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर सिमडेगा से पधारे जैन संत श्री पदम मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन से श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, सद्भाव और वैश्विक शांति का संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने जैन समाज के पूज्य संत आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. एवं उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा. के मार्गदर्शन की सराहना करते हुए जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जीतो संस्था शिक्षा, रोजगार और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही है, लेकिन अब समय है कि इन प्रयासों को विश्व कल्याण के लिए और संगठित रूप दिया जाए। गुरुदेव के सान्निध्य में विश्व नवकार मंत्र दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने का आह्वान किया गया। आचार्य श्री ने अपनी विनम्रता का परिचय देते हुए कहा कि इस अभियान में उनका नाम प्रमुखता से न लिया जाए, उन्होंने केवल एक दिशा देने का कार्य किया है। यह उनके त्याग और साधुता ‘ का जीवंत उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों से 9 अप्रैल को विश्व नवकार मंत्र दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसका पहला आयोजन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति रही थी। वहीं इस वर्ष गृह मंत्री अमित शाह की सहभागिता के साथ इसे देशभर में भव्य रूप से मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक व्याकरण नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसमें मानव जीवन, विश्व शांति और समग्र कल्याण के सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत हो उठा। सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक प्रवचन श्रवण कर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य एवं सम्मानित व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें समता युवा संघ के अध्यक्ष श्री राकेश जैन, श्री अशोक जी सुराणा, श्री विमल जी दस्सानी, श्री घेवरचंद जी नाहटा एवं श्री अमरचंद जी बेगानी शामिल थे। सभी ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए इस आध्यात्मिक पहल की सराहना की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव कल्याण और विश्व शांति की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया, जिसने रांची को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना दिया।
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