अजय दीक्षित
पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव, भारत के अन्य राज्यों के चुनावों की तरह नहीं बल्कि यह 1757 की प्लासी की लड़ाई की तरह है जब मु_ी भर क्लाइव की ब्रिटिश फौज ने तीन लाख की बंगाल के नबाब सिराजुद्दौला को हरा दिया था और मीर जाफर को बंगाल का नबाब बना दिया था। वर्तमान विधानसभा चुनाव,जो कई आयामों, स्तरों, उद्देश्यों,के लिए शाम दाम, दंड से लड़ी जा रही है। पूरा राज्य बंगाल मय समाचार पत्रों, दृश्य मीडिया के दो फाड़ हो गया है।एक भाग भाजपा के साथ है तो दूसरा तृणमूल कांग्रेस के साथ है।वाकी सीपीएम, कांग्रेस दूसरे दल, केवल औपचारिक भूमिका में है। जहां तृणमूल कांग्रेस ने एस आई आर का मुद्दा उठाया है वही भाजपा 15 साल की भ्रष्टाचार, हिंसा, घुसपैठ को मुख्य मुद्दा बना रही है।294 सदस्यीय विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने है । लेकिन भारतीय जनता पार्टी को भी समझमे आ गया है कि यह चुनाव पूरे देश से भिन्न है।बस इतना समझ लो कि भाजपा की भवानीपुर की रैली में बैंड बजा रहे दल की भी उसी रात तृणमूल के लठैत से मार मार खूनी खेल खेला।यह एक बानगी है और यह उस पार्टी के खिलाफ हो रहा है जो देश पर शासन कर रही है।
पोस्टर वाला, टांगें वाला, माइक वाला जो भाजपा के काम कर रहा है उसे तृणमूल कांग्रेस का कोप का भाजन बनाना पड़ेगा।बंगाल का विधानसभा चुनाव इतना बोझिल है कि सर्वेक्षक भी हड़प्रभ है क्योंकि कोई भी मतदाता खुल कर अंकित नहीं कर रहा है।टाइम्स ऑफ इंडिया के शीतल पाल सिंह कहते हैं कि असम, केरल, पांडिचेरी की तरह मतदाता पश्चिमी बंगाल में बोल नहीं रहा है क्योंकि उसे अज्ञात भय है। संदीप घोषाल वीरभूमि में कपड़ा व्यापारी है लेकिन चुनाव की बात करने ही तैयार नहीं बस यह कहते हैं कि दीदी ही आएगा ।
तुड़मूल सरकार ने लोगों को अपनी चाल में ढाल दिया है।
भारतीय जनता पार्टी इस लड़ाई में सुबेदु अधिकारी को आगे कर चुनाव मैदान में है।आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिलीगुड़ी सभा कर रहे हैं और उनकी सभा में इतनी भीड़ है जो बता रही है कि पश्चिमी बंगाल में ज्वाला भभक रही है। लेकिन लोग बोलना नहीं चाहते हैं।
ममता बनर्जी ने एस आई आर को मुद्दा बनाया है और पूरे सूबे से 90 लाख मतदाता डिलीट कर दिया है।
कोलकाता में 11 विधानसभा क्षेत्र है जबकि ग्रेटर कोलकाता से या कहे अंग्रेजी पुरानी स्टेट में 107 सीट है 2021 में यहां पर 90 सीट ममता बनर्जी की तुड़मूल ने जीती थी और भारतीय जनता पार्टी को मात्र 15 सीट मिली थी सीपीएम कांग्रेस एक एक सीट पर जीती थी। अबकी बार भाजपा इस क्षेत्र से कुछ अच्छा स्कोर कर ना चाहती है। मालदा वीरभूमि, मेदिनीपुर, बांकुरा, चौबीस परगना, सहित अनेक जगह पर तुड़मूल, भाजपा में गजब की टक्कर है।
आजादी के बाद पश्चिमी बंगाल में विधान चंद्र राय कांग्रेस के दिग्गज नेता थे उन्होंने आजादी के आंदोलन बहुत ही सराहनीय काम किया।1977 तक कांग्रेस ही बंगाल की सत्ता में थी सिद्धार्थ शंकर राय मुख्यमंत्री रहे। आपातकाल के बाद हुए चुनावों में सीपीएम यानी लेफ्ट पार्टियों का समावेश हुआ और वे विधानसभा चुनाव में बहुमत लाने में सफल हुए। ज्योति बसु 27 वर्ष यानि 2000 तक मुख्यमंत्री रहे उनके बाद सीपीएम की विरासत बुद्धदेव भट्टाचार्य के हाथों में आई 2011 तक 10 वर्ष वह मुख्यमंत्री रहे।2011 तुड़मूल कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता में बैठी है।
लेकिन अब सीपीएम, सीपीई, आरएसपी, कांग्रेस अपना अस्तित्व खो बैठी है।2021 से भारतीय जनता पार्टी मुख्य विपक्षी दल है। लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का बढ़त थी जबकि दक्षिण बंगाल तुड़मूल ने अधिकतर सीट जीती थी।
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