वाशिंगटन,14 अपै्रल। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल होने का एक बड़ा कारण सामने आया है। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका ने बैठक में ईरान से 20 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने की मांग रखी थी। ईरान ने इसे घटाकर केवल 5 साल का सुझाव दिया था। इसी मांग पर दोनों देश सहमत नहीं हो सके और वार्ता बिना नतीजे के समाप्त हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 20 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन रोकने और ईरान से देश के सभी अत्यधित संवर्धित यूरेनियम हटाने को कहा। ईरानियों ने इसके बदले नियंत्रित तरीके से यूरेनियम को कम करने की प्रक्रिया पर सहमति दी। इसके बाद ईरान को लगा कि वे समझौते के करीब हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से वे हैरान रह गए। वेंस ने समझौता न होने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, जिससे ईरानी बेहद नाराज हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान के साथ मिस्र-तुर्की भी शामिल है। मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी इस हफ्ते वाशिंगटन का दौरा करेंगे। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन भी मध्यस्थता की कोशिश में जुटे हैं। फिदान ने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरानी अमेरिकी प्रस्ताव का मूल्यांकन करेंगे और जल्द अपनी प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रखने के लिए 45-60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर विचार हो सकता है।
शांति वार्ता फेल होने के बीच राजनीतिक वैज्ञानिक इयान ब्रेमर ने मंगलवार सुबह एक्स पर बताया कि अमेरिका और ईरान यूरेनियम संवर्धन को साढ़े 12 साल के लिए निलंबन करने के करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सूचना के स्रोत या मामले के विवरण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। ईरानी वार्ता दल के सदस्य ईरानी सांसद सैयद महमूद नबावियन ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर अमेरिका की 2 मांगें ही समझौते न हो पाने का कारण थीं।
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