नई दिल्ली,14 अपै्रल (आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 135वीं अंबेडकर जयंती के मौके पर संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर भारत रत्न डॉ. बीआर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लागू करने की बात कही. उन्होंने कहा कि लोकसभा में महिला सांसदों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाना सही लगता है.
एक्स पर एक पोस्ट के साथ अटैच एक लेटर में उन्होंने कहा, आज 14 अप्रैल, भारत के इतिहास में बहुत अहमियत रखता है. यह डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती है, जिन्हें देश बनाने में उनके हमेशा रहने वाले योगदान के लिए बहुत सम्मान दिया जाता है. मैं उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनके कमिटमेंट को याद करता हूं, जो हमारी यात्रा को गाइड करता रहता है.
उन्होंने प्रस्ताव को मिले जोश पर खुशी जताई और पढ़ाई, साहित्य, कला, संगीत, सिनेमा, डांस और विरासत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की तारीफ की. उन्होंने कहा, अगले दो दिनों में 16 तारीख को पार्लियामेंट नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े एक जरूरी संवैधानिक संशोधन पर चर्चा करने और उम्मीद है कि उसे पास करने के लिए फिर से बैठेगी. मैं देख रहा हूं कि इसके प्रति बहुत जोश है. पूरे देश की महिलाएं एक विकसित भारत बनाने में योगदान देने का एक मजबूत मौका मिलने पर अपनी खुशी जाहिर कर रही हैं.
उन्होंने कहा, आप सभी हमारी नारी शक्ति, देश की जिंदगी के हर पहलू में अपनी पहचान बना रही हैं और यह सक्रिय योगदान हमारे समय की सबसे खुशी देने वाली बातों में से एक है. स्टार्टअप की दुनिया को देखिए…उनमें से कितने में लीडरशिप रोल में महिलाएं हैं. साइंस और इनोवेशन जो 21वीं सदी में इंसानियत की तरक्की को गाइड कर रहे हैं, उनमें महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है. एकेडमिक्स, लिटरेचर, आर्ट, म्यूजिक, सिनेमा, डांस और हेरिटेज में भी यही बात है.
पीएम मोदी ने स्पोर्ट्स में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी पर भी ज़ोर दिया, और इस बात पर ज़ोर दिया कि युवा लड़कियां पुरानी सोच को चुनौती दे रही हैं. शायद यह बदलाव स्पोर्ट्स में सबसे ज़्यादा कहीं और नहीं दिखता, जहां एक शांत क्रांति हुई है. भारतीय महिला एथलीट ज़्यादा मेडल जीत रही हैं, रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और पुरानी सोच को चुनौती दे रही हैं.
उनकी सफलताएं कई दूसरी युवा लड़कियों को स्पोर्ट्स में आगे बढऩे के लिए इंस्पायर कर रही हैं. उन्होंने कहा कि कई सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और लखपति दीदियों ने दिखाया है कि कैसे आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है और दूसरी महिलाओं को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह सही है कि महिलाओं को पार्लियामेंट में और मजबूत बनाने के लिए लोकसभा में उन्हें ज़्यादा सीटें दी जाएं. उन्होंने याद किया कि कैसे सरदार वल्लभभाई पटेल ने महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व करने की दिशा में काम किया था और आजादी के बाद भारतीय समाज ने उन्हें बराबर अधिकार दिए.
ऊपर बताए गए कई फ़ील्ड में महिलाओं के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए, यह सही है कि हम लेजिस्लेटिव बॉडीज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएं. असल में यह एक ऐसा विषय है जिस पर न केवल आज बल्कि कई दशकों पहले भी आम सहमति है. लगभग सौ साल पहले अहमदाबाद म्युनिसिपैलिटी के प्रेसिडेंट के तौर पर अपने समय के दौरान, सरदार पटेल ने महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व करने की दिशा में काम किया था. जैसे ही भारत ने एक आजाद देश के तौर पर अपनी यात्रा शुरू की, हमारे पास महिलाओं और पुरुषों के लिए बराबर वोटिंग अधिकार थे. दुनिया भर के कई दूसरे देशों में महिलाओं को इसके लिए सालों या सदियों तक इंतजार करना पड़ा.
उन्होंने आगे कहा, पिछले तीन-चार दशकों में कानूनी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कोशिशें की गई, लेकिन कोशिशें पूरी तरह से कामयाब नहीं हुई. कुछ मौकों पर यह बहुत करीब आकर भी बहुत दूर रह जाने का मामला था. दुर्भाग्य से एक ऐसा विषय जिस पर हमेशा आम सहमति रही है, वह कभी भी अपने तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंच पाया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बिल के लागू होने से 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना और मजबूत होगा. साल 2047 में हम गुलामी से आजादी के सौ साल पूरे करेंगे. जब भारत के लोग तब तक विकसित भारत के सपने को पूरा करने में जुट जाएंगे, तो आइए हम यह पक्का करें कि भारत की नारी शक्ति, जो हमारी लगभग आधी आबादी है, की उम्मीदों के साथ न्याय हो.
उन्होंने कहा, जब वे पॉलिसी बनाने और फैसले लेने में सक्रिय हिस्सा लेती हैं, तो विकसित भारत की तरफ हमारा सफर और मजबूत होता है. उन्होंने आगे कहा कि कानूनी फैसले लेने में महिलाओं की हिस्सेदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता और उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों से महिला आरक्षण बिल को लागू करने में मदद करने की अपील की.
यह जरूरी है कि हम अपने विकास के रास्ते में और तेजी लाने के लिए जो भी हो सके करें और इसके लिए महिलाओं की एक्टिव हिस्सेदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता. इसी नियम की वजह से 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास हुआ और इसी नियम की वजह से यह संवैधानिक बदलाव आज की जरूरत बन गया है. मुझे यकीन है कि आप भी अगले कुछ दिनों में संसद में इसके पास होने का इंतजार कर रहे होंगे. यह जरूरी है कि हम सब एक साथ आएं और यह पक्का करें कि कानूनी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व जल्द से जल्द सही मायने में लागू हो.
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