० जिला पंचायत में सीईओ बनाकर भेजा जा रहा है
रायपुर, 15 अप्रैल (आरएनएस)। प्रदेश में इस समय राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों कहे जाने वाले उपजिलाधीशों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। जिसको लेकर उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डिप्टी कलेक्टरों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। वर्ष २०१३ बैच के 30 में से 3 आईएएस बन गये है तथा 27 बचे है। वहीं 2014 बैच के 30 डिप्टी कलेक्टर है अब 2015 बैच के उससे दोगुना है। केंद्र शासन के डीपीओटी मंत्रालय ने आईएएस अधिकारियों के पदों का रिविजन कर दिया है जिसके तहत अब १६७ पद स्वीकृत हो गये है। प्रदेश में डिप्टी कलेक्टरों को संयुक्त कलेक्टर के पश्चात ज्वाइन कलेक्टर बनाया जाता है। इधर डिप्टी कलेक्टर अधिकारियों का कहना है कि वे जिंदगी भर प्रशाासन की सेवा करता है लेकिन उसे आगे पीछे कुछ नहीं मिलता।
प्रदेश में डिप्टी कलेक्टरों की संख्या २४८ पहुंच गई है। इतने छोटे राज्य में इतने ज्यादा डिप्टी कलेक्टरों की जरूरत नहीं है। राज्य में डिप्टी कलेक्टरों को जनपद का सीईओ बनाया गया है। यह पद बढ़ाया गया तो फिर बढ़ता चला जाएगा इसका खामियाजा अब अफसरों को ही उठाना पड़ेगा।
राज्य में इस समय प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए डिप्टी कलेक्टरों को कई मंत्रियों का ओएसडी बनाया गया है। लेकिन यहां पर भी उनकी दाल नहीं गल रही है। कई विवादास्पद ओएसडी को हटाया गया है। लेकिन इसके बावजूद दूसरे अधिकारी की पदस्थापना की जा रही है। हाल ही राजस्वमंत्री टँकराम वर्मा एवं नगरीय निकाय मंत्री के विशेष सहायकों को हटा दिया।
आर शर्मा
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