लखनऊ 15 अप्रैल (आरएनएस ), उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि (विधायक निधि) के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि का व्यय निर्धारित मार्गदर्शी सिद्धांतों और समय-समय पर जारी शासनादेशों के अनुसार ही किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निधि की धनराशि को स्वीकृति के बाद जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के जमा खाते में स्थानांतरित कर योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही खर्च किया जाए।निर्देशों में कहा गया है कि व्यय प्रबंधन एवं शासकीय खर्च में मितव्ययिता से संबंधित वित्त विभाग द्वारा जारी आदेशों का विशेष रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राजकीय धन के उपयोग में उत्तर प्रदेश बजट मैनुअल में उल्लिखित शर्तों और वित्तीय औचित्य के मानकों का कड़ाई से अनुपालन किया जाए। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि विधायक निधि के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों के सापेक्ष वास्तविक रूप से देय कर के बराबर ही धनराशि का आहरण एवं व्यय किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित मुख्य विकास अधिकारी की होगी।इसी क्रम में प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग अनिल कुमार ने विधायक निधि के अंतर्गत विकास कार्यों को गति देने पर विशेष बल दिया है। उन्होंने प्रदेश के सभी मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि विधायकों से प्राप्त प्रस्तावों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।जारी निर्देशों के अनुसार, विधान मंडल सदस्यों से प्राप्त प्रस्तावों को स्वीकृत करने तथा उन पर आवश्यक तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 45 दिन की समयसीमा तय की गई है। प्रमुख सचिव ने वर्ष 2018 में जारी मूल शासनादेश का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद कार्यों का विभाजन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं इसी निर्धारित अवधि के भीतर पूरी की जानी चाहिए, ताकि कार्यों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि विधायकों द्वारा दिए गए विकास कार्यों के प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और सभी मुख्य विकास अधिकारी व्यक्तिगत रूप से इन कार्यों की निगरानी सुनिश्चित करें। शासन ने स्पष्ट किया है कि 45 दिनों के भीतर हर हाल में विभागीय कार्रवाई पूर्ण की जानी चाहिए, जिससे विकास कार्यों को समय पर गति मिल सके।सरकार का मानना है कि इन निर्देशों के सख्ती से पालन से स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों, जैसे सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जनोपयोगी सुविधाओं के निर्माण में तेजी आएगी। समय पर बजट आवंटन और कार्यों के शीघ्र प्रारंभ होने से आम जनता को योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से मिल सकेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित होगा।
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