-झारखंड आंदोलनकारियों के स्वाभिमान की रक्षा समारोह का सम्पन्न
दुमका 17 अप्रैल (आरएनएस)। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा प्रमंडल व 1831 – 32 सिंदराय कोल – बिंदराय कोल विद्रोह मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में झारखंड आंदोलनकारियों के स्वाभिमान की रक्षा समारोह का अयोजन दुमका स्थित सिद्धू कानू इंडोर स्टेडियम में किया गया. समारोह से पूर्व शहर के बीचों बीच जुलूस प्रदर्शन किया गया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय जामताड़ा के जिला अध्यक्ष नारायण मंडल, स्वागत भाषण प्रमंडलीय अध्यक्ष जीदन कोल ब धन्यवाद ज्ञापन किंकर चौहान ने की.
मौके पर मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि संथाल परगना के आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहादत के बाद झारखंड राज्य बना है. राज्य की पहचान हुई है और मुख्यमंत्री बने हैं. उन्हें सम्मान मिला है.सरकार झारखंड आंदोलनकारियों को न्याय के साथ सम्मान एवं समाज में स्वाभिमान से जीने का अधिकार दे. संघर्ष के बाद एक और संघर्ष करना पादना चुनौती की बात है इसके बावजूद भी झारखंड आंदोलनकारी रोजी रोजगार नियोजन की गारंटी तथा जेल जाने के बाध्यता समाप्त कर सभी को सम्मान पेंशन 50- 50 हजार रु देने की मांग को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है. यह विडंबना हैं . आज हम आंदोलनकारी को अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में बाल बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
केन्द्रीय अध्यक्ष विदेशी महतो ने कहा कि जिस दिन झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष करना छोड़ देंगे तो हमारी पहचान, अस्तित्व व अस्मिता समाप्त हो जाएगी इसलिए क़दम दर कदम संघर्ष करते रहना है.
केंद्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती सरोजिनी कच्छप ने कहा कि सरकार झारखंड आंदोलनकारियों को सामाजिक व आर्थिक रूप से सक्षम बनाएं.
दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमंडल के अध्यक्ष श्रीमती रोजलीन तिर्की ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी राज्य की बड़ी ताकत है,एक शक्ति है सरकार सम्मान दे, पहचान दे.
प्रभारी अन्थन लकड़ा ने कहा कि झारखंड बेरोजगारियों के अपने अधिकारों की रक्षा करें 100 घंटे का झारखंड बंद करने की जरूरत होगी उसके लिए भी तैयार रहे. राज्य बनने के बाद भी हमारे रोजी रोजगार नियोजन को लूटा जा रहा है जमीन जगह से बेदखल किया जा रहा है. जिसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा.
दुमका जिला अध्यक्ष कोलेश्वर सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों जाति धर्म और पार्टी की भावनाओं से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है किसी की गरीबी ,कमजोरी का मजाक ना बनाएं .मुश्किलों या मुसीबतो में सबका साथ दें, आगे बढ़े. आपकी ताकत ही पहचान है. एक और आंदोलन के लिए तैयार रहें.
मौके पर भारतेंदु मुर्मू, बुधन हंसदा, जगदीश राउत, राजेंद्र सोरेन, बुधन मुर्मू, अशोक महतो, मुरारी चौधरी, आर के झा, पंकज मंडल, तैयब अंसारी, सुरेश प्रसाद मंडल रमाकांत तत्वा, छोटन मुर्मू, रमापति, कमला कांत झा, नेहरु सोरेन, जमील अंसारी,लखन किस्कू, जगदीश मुर्मू, प्रदीप कोल,सहित अन्य प्रमुख थे.
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