सूरत,19 अपै्रल (आरएनएस)। पश्चिम एशिया में जंग का असर अब भारत के कारखानों में दिखने लगा है। जंग की वजह से पैदा हुए एलपीजी संकट के चलते सूरत में कई कारखाने बंद हो गए हैं। इसके चलते दूसरे राज्यों के मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। आज सुबह सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर घर लौट रहे कारीगरों-मजदूरों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान कुछ देर के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए।
रविवार होने के चलते आज उधना स्टेशन पर लोगों की भारी भीड़ रही। इस दौरान करीब 11:30 बजे उधना-हसनपुर ट्रेन में बैठने के लिए लोगों को लाइन में खड़ा किया जा रहा था। तभी कुछ लोगों ने लाइन तोड़कर आगे बढऩे की कोशिश की, जिस वजह से भगदड़ जैसे हालात हो गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने भीड़ पर हल्का लाठीचार्ज किया। इसका वीडियो भी सामने आया है।
सूरत में बड़ी संख्या में टेक्सटाइल कारखाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां रोजाना लगभग 15,000 गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। हालांकि, ईरान युद्ध के चलते एलपीजी की कमी के कारण उत्पादन लगभग ठप पड़ा है। कई यूनिट्स को अपना काम धीमा करना पड़ा है या कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा है। इसी वजह से यहां काम करने वाले मजदूर मजबूरी में घरों की ओर लौट रहे हैं।
काम बंद होने और रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढऩे के कारण बड़ी संख्या में मजदूर सूरत से अपने गांवों को लौट रहे हैं। इनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। अनुमान के मुताबिक, अब तक करीब 3 लाख मजदूर सूरत छोड़ चुके हैं। गैस की कमी के चलते पहले रोजाना लगभग 6.5 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता था, जो अब घटकर करीब 4.5 करोड़ मीटर रह गया है। इससे मजदूरों के साथ-साथ व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
शनिवार शाम से ही स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। रेलवे ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को लाइन में खड़ा किया है। इस दौरान 5 किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। रेलवे अधिकारी श्रवण कुमार मेघवाल ने बताया, अब तक 4 ट्रेनों को रवाना किया जा चुका है, जो शनिवार रात 1:30 बजे से रविवार सुबह 9 बजे के बीच चलाई गईं। इनमें से 2 ट्रेनों में 8000, जबकि अन्य 2 में 1,200 लोग रवाना हुए।
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