दो साल बाद भी लागू नहीं हुआ बिल, जनगणना-परिसीमन की शर्तों पर उठाए सवाल; 25 अप्रैल से ‘महिला हक जागरूकता अभियानÓ का ऐलान
रांची 21 अप्रैल (आरएनएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। रांची जिला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने मौजूदा महिला आरक्षण बिल को ‘महिला विरोधीÓ और ‘गुमराह करने वालाÓ करार देते हुए कहा कि यह महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के बजाय उन्हें भ्रमित करने का जरिया बन गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष सोमनाथ मुंडा, अर्चना चौधरी, शाहरुख खान, जगदीश साहू, अब्दुल सलाम अंसारी और मीनू मनीषा खलखो मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण विधेयक अब तक लागू नहीं किया गया है और सरकार ने इसकी कोई स्पष्ट समय-सीमा भी तय नहीं की है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिल को जनगणना और परिसीमन की शर्तों से जोड़कर जानबूझकर लटका रखा है। उनका कहना है कि इससे महिलाओं को तत्काल आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मुख्य आरोपों में कांग्रेस ने कहा कि बिल को लागू करने में अनावश्यक देरी की जा रही है और इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही, महंगाई, बेरोजगारी और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार इस बिल को उछाला जा रहा है। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन की आड़ में सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। सोमनाथ मुंडा ने कहा, बिना नई जनगणना और परिसीमन के यह बिल सिर्फ कागजी साबित होगा। जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं होती, महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। सरकार को 2023 का बिल तुरंत लागू करना चाहिए, वरना हम सड़क पर उतरेंगे। अर्चना मिश्रा ने कहा, भाजपा ने महिलाओं को सिर्फ नारे दिए हैं, अधिकार नहीं। अगर नीयत साफ होती तो 2024 में ही मौजूदा सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता था। यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है।
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