रांची 21 अप्रैल (आरएनएस)। मोराबादी स्थित राजकीय अतिथि शाला में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग भारत सरकार एवं झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 3 जुलाई 2025 की बैठक और कार्रवाई की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों ने अपने-अपने मुद्दे उठाए। इस दौरान शुढी समाज एवं वैश्य समाज के केंद्रीय अध्यक्ष के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रमेश कुमार साहू ने अपनी समाज से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग उनके समाज के मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और उन्हें लंबे समय से सिर्फ प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है। रमेश कुमार साहू ने बताया कि वर्ष 2006 में शुढी समाज को अति पिछड़ा वर्ग में शामिल करने के लिए आवेदन दिया गया था। लगभग 10 वर्षों तक विभिन्न स्तरों पर जांच-पड़ताल के बाद राज्य स्तर पर इस समाज को अति पिछड़ा वर्ग (एनेक्सचर-1) में शामिल किया गया। इसके आधार पर झारखंड सरकार ने 28 अगस्त 2020 को पत्रांक 4194 के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को पत्र भेजकर शुढी समाज समेत 36 उपजातियों को केंद्र सूची में शामिल करने का अनुरोध किया.
हालांकि, इस पत्र पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया। साहू ने कहा कि जुलाई 2025 में हुई बैठक का भी कोई आधिकारिक प्रतिवेदन (प्रोसिडिंग) या कार्रवाई सामने नहीं आई।
बैठक के दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों से वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक राष्ट्रीय स्तर पर उनके समाज को मान्यता नहीं मिल पाई है। उन्होंने आयोग से स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की।
इस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। इसके जवाब में साहू ने 2020 के पत्र की प्रति प्रस्तुत की। इसके बाद आयोग की ओर से हाई कोर्ट में लंबित किसी मामले का हवाला देते हुए प्रक्रिया को पुन: प्रारंभ करने की बात कही गई। वहीं, झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद ने कहा कि हाई कोर्ट के निर्देश की समय-सीमा स्पष्ट नहीं है, इसलिए जांच की अवधि और प्रक्रिया पर निर्णय लिया जाना बाकी है। बैठक में संतोषजनक निष्कर्ष नहीं निकलने पर रमेश कुमार साहू ने चेतावनी दी कि यदि 2 महीने के भीतर उनके समाज को न्याय नहीं मिला, तो वे सड़क पर उतरकर दोनों आयोगों के खिलाफ आंदोलन करेंगे।
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