राजनांदगांव,22अप्रैल (आरएनएस)। पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा(छुरिया) जिला राजनांदगांव द्वारा भारतीय संविधान के महान शिल्पकार और देश के प्रथम कानून मंत्री डा. भीमराव अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के उपलक्ष्य में दो सत्रों में कार्यक्रम आयोजित किया गया । सरस्वती शिशु मंदिर परिसर, पाटेकोहरा में आयोजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मासिक परिचर्चा और दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी हुई । दोनों कार्यक्रम पुरवाही साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष शिवप्रसाद लहरे के संयोजन में सम्पन्न हुए । परिचर्चा का विषय था-सामाजिक क्रांति के प्रतीक और संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर। परिचर्चा के मुख्य अतिथि शिवनाथ साहित्य धारा डोंगरगांव के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र कुमार बघेल ‘मधु थे। अध्यक्षता मोहला के वरिष्ठ साहित्यकार और वनांचल साहित्य समिति मोहला के सचिव जितेंद्र कुमार पटेल ‘विद्रोहीवरिष्ठ कवि ने की । विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप वरिष्ठ साहित्यकार और शिवनाथ साहित्य धारा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार तिवारी ‘वीरू डोंगरगांव,डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा अध्यक्ष, वनांचल साहित्य समिति मोहला, ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर अध्यक्ष साकेत साहित्य परिषद सुरगी, दिनेश कुमार कुरेटी ‘दिलेर कवि बूचाटोला की उपस्थिति रही। स्वागत भाषण देते हुए गोष्ठी के संयोजक एवं पुरवाही साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष शिव प्रसाद लहरे ने पुरवाही के गठन के साथ ही दस वर्षों की मासिक काव्य गोष्ठी, परिचर्चा, वार्षिक समारोह एवं कवि सम्मेलनों का उल्लेख किया, जिनसे को पुरवाही एक विशेष पहचान मिली । आधार वक्तव्य पुरवाही समिति के सचिव हेमलाल सहारे ने दिया। उपस्थित वक्ताओं ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए देश एवं समाज हित में किये गए उनके महान कार्यों को याद किया । मुख्य अतिथि की आसंदी से महेंद्र कुमार बघेल ने कहा कि डाक्टर अंबेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा करना तभी सार्थक होगा जब उनके विचारों को हम अपने वास्तविक जीवन में आत्मसात करें। इसके लिए साहित्यकारों को समाज के सचेतक के रूप में कार्य करना चाहिए । छुआछूत अभी भी कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में जारी है, जिसको दूर करना बुद्धिजीवी वर्ग की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जितेंद्र कुमार पटेल ने कहा कि डॉ . अंबेडकर अत्यंत मेधावी शख्स थे।उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उनके विरोधी भी उनकी प्रतिभा के कायल थे।उन्होंने छुआछूत को दूर करने के लिए अप्रतिम और अनुकरणीय योगदान दिया ।विशिष्ट अतिथि नारायण सिन्हा ने कहा कि यदि डॉ.अंबेडकर नहीं होते तो आज हम सब यहाँ नहीं होते। विशिष्ट वक्ता वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि अंबेडकर जी समाज में समरसता के पक्षधर थे। वे अपने विशिष्ट गुणों के कारण पूज्यनीय है। उनकी प्रतिभा के कारण ही उन्हें संविधान निर्माण के लिए प्रारूप समिति का अध्यक्ष और आजाद भारत के प्रथम कानून मंत्री का महती दायित्व मिला।डॉ. इकबाल खान ने कहा कि भीमराव जी अपनी शिक्षा के कारण विशेष सम्मानीय हैं। ।ओमप्रकाश साहूअंकुरने कहा कि डॉ.अंबेडकर जी का जीवन संघर्षों में बीता,लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने भगवान बुद्ध की जीवनी और उनके जीवन -दर्शन का गहरा अध्ययन किया । यही कारण है कि डॉ. अम्बेडकर के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आ गया। डॉ. अम्बेडकर ने आजादी की लड़ाई के दौर में समाज में व्याप्त छुआछूत के विरुद्ध वंचित वर्ग के लिए आवाज बुलंद की। दिनेश कुरेटी ‘दिलेर ने कहा कि बाबा साहब देश के क्रांतिसूर्य हैं । हेमलाल सहारे ने कहा कि विश्व -वंदनीय बाबा साहब के सामाजिक समानता के भावों को समाज तक ले जाना आवश्यक है। दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता चिचोला के वरिष्ठ गीतकार अरविंद कुमार लाल ‘लमसेना ने की। कवियों ने विभिन्न विधाओं में रचित गीत, कविता से लोगों को आनंदित किया।काव्यपाठ करने वालों में अलख राम यादव,महेंद्र बघेल ‘मधु, जितेन्द्र पटेल , अरविंद कुमार लाल , डॉ. इकबाल खान, वीरेंद्र तिवारी , दिनेश कुमार कुरेटी दिलेर , ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर , कोमल सिंह गुरु,कुलेश्वर दास साहू , वेदराम पटेल , राजेन्द्र कुमार साहू , शिवप्रसाद लहरे , नंदकुमार साहू ‘नादान, जशवंत कुमार मंडावी, हेमलाल सहारे, मोतीराम फलेंद्र तथा सेवक सिन्हा शामिल थे। कार्यक्रम में नारायण सिन्हा, राज कुमार सिन्हा,भावेश जी, जय कुमार सिन्हा सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे । परिचर्चा का संचालन पुरवाही साहित्य समिति के कोषाध्यक्ष नंदकुमार साहू ‘नादान ने काव्य गोष्ठी का संचालन संयुक्त रूप से कोमल सिंह गुरु और राजेन्द्र कुमार साहू ने किया ।कवि शिव प्रसाद लहरे ने आभार व्यक्त किया।
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