रायपुर 22 अप्रैल (आरएनएस) अक्षय तृतीया पर छत्तीसगढ़ में मंदिरों की ताकत का बड़ा प्रदर्शन, धान खरीदी को लेकर सीएम का संकेत—बदल सकती है पूरी व्यवस्था! रायपुर में धार्मिक ऊर्जा और संगठन शक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने सीधे सत्ता के दरवाजे तक दस्तक दी, ‘मंदिर महासंघ, छत्तीसगढ़’ के भव्य शुभारंभ के साथ प्रदेश के मठ-मंदिरों को एक मंच पर लाने की ऐतिहासिक पहल हुई और इसी के तुरंत बाद महासंघ का प्रतिनिधिमंडल सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास पहुंचा जहां मंदिरों की जमीन पर उगने वाले धान के पंजीकरण और सरकारी खरीदी का बड़ा मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया, कार्यक्रम की शुरुआत माँ बम्लेश्वरी के आशीर्वाद और संतों की उपस्थिति में हुई जहां साफ संदेश दिया गया कि अब मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं बल्कि समाज निर्माण और मार्गदर्शन के केंद्र बनेंगे, पूरे प्रदेश से आए मंदिर न्यासों, धर्माचार्यों और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि मंदिरों को संगठित कर उनकी आर्थिक और सामाजिक ताकत को मजबूत किया जाएगा, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने जो ज्ञापन रखा उसमें सबसे अहम मांग यही रही कि मंदिरों की कृषि भूमि से पैदा होने वाले धान को भी किसानों की तरह पंजीकृत किया जाए और सरकार उसे खरीदे, इस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए साफ संकेत दिया कि मामला कैबिनेट तक जाएगा और जल्द निर्णय हो सकता है, यही नहीं महासंघ ने बोनस की मांग भी उठाई ताकि मंदिरों की व्यवस्थाएं मजबूत हों और प्राकृतिक आपदाओं में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी सहायता भी सुनिश्चित की जाए, महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट और संयोजक मदन मोहन उपाध्याय ने साफ कहा कि आने वाले समय में मंदिरों में पुजारियों और न्यासियों का प्रशिक्षण होगा, मंदिरों की जमीन और संपत्ति का बेहतर उपयोग होगा और हर सक्षम मंदिर में गौशाला, यज्ञशाला, पाकशाला और पाठशाला जैसी व्यवस्थाएं फिर से खड़ी की जाएंगी ताकि सनातन परंपरा को जमीनी ताकत मिले, इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव समेत कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे जिन्होंने इस पहल को खुला समर्थन दिया, यह आयोजन सिर्फ एक शुरुआत नहीं बल्कि एक बड़े बदलाव की पटकथा जैसा नजर आया जहां धर्म, समाज और व्यवस्था को जोड़ने की कोशिश साफ दिखी, अब निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं क्योंकि अगर मंदिरों के धान की खरीदी का रास्ता खुलता है तो यह प्रदेश की धार्मिक संस्थाओं की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है—और यही इस पहल का सबसे बड़ा असर साबित हो सकता है।


