लखनऊ 23 अप्रैल (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में विकसित कृषि–विकसित भारत 2047 के लिए कृषि में परिवर्तन विषय पर आयोजित छठी कृषि विज्ञान कांग्रेस की महत्वपूर्ण सिफारिशों और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित इस कांग्रेस में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के सुधार हेतु कई रणनीतिक निर्णय लिए गए हैं, जो प्रदेश की कृषि को आधुनिक और लाभप्रद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इस विज्ञान कांग्रेस में लगभग 700 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 350 वैज्ञानिक और 350 छात्र शामिल थे, जो परिषद की बढ़ती वैश्विक पहचान का संकेत है।महानिदेशक ने बताया कि भविष्य की कार्ययोजना के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन, रोग नियंत्रण और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए काला नमक चावल की नई किस्मों और मक्के की संकर प्रजातियों के विकास जैसे प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही बागवानी क्षेत्र में शर्बती अमरूद की नई किस्मों के माध्यम से किसानों की आय में हो रही उल्लेखनीय वृद्धि को देखते हुए अन्य फसलों पर भी शोध कार्य जारी है। गन्ने के साथ सह-फसली खेती और धान की सीधी बुवाई के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है।डॉ. सिंह ने बताया कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उन्हें सीधे बड़े बाजारों से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु मंडलीय स्तर पर प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों की दक्षता बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है। हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान के सहयोग से नवाचार और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा उत्तर प्रदेश में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए इस संस्थान का एक क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी प्रक्रियाधीन है।पशुपालन क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य, आहार प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर अनुसंधान किया जा रहा है। प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ही इसकी प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। किसानों की वर्तमान आर्थिक स्थिति के सटीक आकलन के लिए एक विस्तृत आर्थिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है। दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मॉडल पर आधारित विविधीकरण और संरक्षित खेती की एक बड़ी परियोजना पर कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिससे प्रदेश के कृषि परिदृश्य में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन आने की उम्मीद जताई गई है।
प्रेस वार्ता के दौरान कृषि अनुसंधान परिषद उत्तर प्रदेश के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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