लखनऊ 23 अप्रैल (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश में अब कोई भी बच्चा पढ़ाई की व्यवस्था से बाहर न रहे, इसके लिए सरकार द्वारा ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, अपार प्लस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से छात्रों की पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति की जानकारी एक ही डिजिटल मंच पर दर्ज की जा रही है, जिससे किसी भी छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर नहीं रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में भी लागू की जा रही है।प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि अपार प्लस व्यवस्था उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की आधारशिला बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र की एकीकृत डिजिटल पहचान सुनिश्चित कर न केवल उसकी शैक्षणिक प्रगति पर निगरानी रखी जा रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर न रहे। उन्होंने बताया कि मिशन मोड में संचालित इस अभियान से पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे भविष्य में नीति निर्माण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।11 अप्रैल से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलने वाले इस अभियान में 4.24 करोड़ छात्रों को जोडऩे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 2.68 करोड़ से अधिक छात्रों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है, जिससे 63 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। विशेष रूप से सरकारी विद्यालयों में 82 प्रतिशत से अधिक छात्रों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है, जो शिक्षा को जमीनी स्तर तक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत तथा अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।अपार प्लस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को एक स्थायी डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से उसके नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित संपूर्ण शैक्षणिक विवरण एकीकृत डिजिटल मंच पर सुरक्षित रूप से दर्ज किया जा रहा है। आधार से जुड़ी होने के कारण यह पहचान संख्या छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और विद्यालय परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वत: स्थानांतरित हो जाता है, जिससे अभिलेखों की निरंतरता बनी रहती है। इस प्रणाली से पढ़ाई छोडऩे वाले छात्रों और फर्जी नामांकन की पहचान करना भी आसान हो गया है, वहीं सरकार को तात्कालिक आंकड़ों के आधार पर प्रभावी निगरानी और नीति निर्माण में सहायता मिल रही है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा को आंकड़ा आधारित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।सरकार द्वारा अपार व्यवस्था के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए आंकड़ों के शुद्धिकरण, आधार से जोडऩे, बायोमेट्रिक अद्यतन और अभिभावकों की सहमति जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत कर व्यवस्थित रूप से लागू किया गया है। प्रत्येक शनिवार लक्षित विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि जिला और ब्लॉक स्तर पर सतत समीक्षा के माध्यम से प्रगति सुनिश्चित की जा रही है। इस मिशन के माध्यम से प्रत्येक छात्र की शैक्षिक उपलब्धियां और प्रगति एक ही मंच पर सुरक्षित रहने से छात्रवृत्ति, विद्यालय परिवर्तन, उच्च शिक्षा में प्रवेश और करियर मार्गदर्शन की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और सरल बन रही है।
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