लखनऊ 26 अप्रैल (आरएनएस )। सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच ने देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सटीक जातिवार जनगणना सुनिश्चित करने के लिए अपनी आवाज बुलंद की है। मंच के महामंत्री जगदीश शरण गंगवार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि मंच पिछले आठ वर्षों से समाज के बौद्धिक वर्गों जैसे पूर्व सैन्य अधिकारी, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, अधिवक्ता और व्यवसायियों के साथ मिलकर सामाजिक सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है।उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज की जनसंख्या 12 प्रतिशत से अधिक है और यह समाज राज्य की लगभग 300 विधानसभा सीटों पर हार-जीत तय करने की क्षमता रखता है। वर्तमान समय में भी बड़ी संख्या में इस समाज के प्रतिनिधि सदन में मौजूद हैं। वर्ष 2026 की जनगणना से संबंधित विसंगतियों के संदर्भ में भारत सरकार के महारजिस्ट्रार द्वारा 22 जनवरी 2026 से प्रारम्भ होने वाली जनगणना के प्रारूप पर मंच ने आपत्ति जताई है।मंच ने कहा कि प्रारूप के क्रम संख्या 12 पर क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य से संबंधित है वाले कॉलम में अन्य पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख न होने से समाज में रोष है। मंच का मानना है कि इससे पिछड़ी जातियों की सही गणना नहीं हो सकेगी और वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे।प्रेस वार्ता के दौरान अरुण कुमार सिन्हा (पूर्व आईएएस एवं संस्थापक संरक्षक), डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार (अध्यक्ष), रवीन्द्र सिंह गंगवार, वी.आर. वर्मा, मुनीश गंगवार, आर.एल. निरंजन, योगेन्द्र सचान, जय सिंह सचान (कुर्मी सभा लखनऊ), के.सी. वर्मा (सरदार वल्लभभाई ट्रस्ट), ज्ञान सिंह (पटेल प्रतिनिधि सभा, लखनऊ) तथा राजबहादुर सिंह (छत्रपति शिवाजी शोध संस्थान) सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।मंच ने सरकार से मांग की है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए जनगणना में अलग से कॉलम रखा जाए, जिससे जातिवार आंकड़े स्पष्ट रूप से सामने आ सकें। इसके साथ ही मंच ने कुर्मी समाज के लोगों से अपील की है कि जनगणना के समय वे अपनी उपजाति के साथ कुर्मी शब्द अवश्य लिखवाएं, ताकि समाज की वास्तविक संख्या और शक्ति का सही आकलन हो सके।इस मुहिम में मंच को अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा, कुर्मी सभा लखनऊ, छत्रपति शिवाजी संस्थान कानपुर तथा सरदार वल्लभभाई पटेल ट्रस्ट लखनऊ जैसे प्रमुख संगठनों का समर्थन प्राप्त होने की भी जानकारी दी गई।
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