लखनऊ 27 अप्रैल (आरएनएस )। राज्यसभा में उप नेता विपक्ष प्रमोद तिवारी ने उत्तर प्रदेश में लगाए जा रहे प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को पूरी तरह अव्यवहारिक बताते हुए सरकार पर उपभोक्ताओं के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर की रीडिंग सही नहीं आ रही है और इससे सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।प्रमोद तिवारी ने कहा कि उन्हें स्वयं बिजली विभाग में मंत्री के रूप में कार्य करने का अनुभव रहा है, इसलिए वह इस विषय की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में लगाए जा रहे प्रीपेड स्मार्ट मीटर गलत रीडिंग दे रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि बिजली अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) के अंतर्गत प्रत्येक उपभोक्ता को यह अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी सुविधा के अनुसार पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर का विकल्प चुन सके। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से जबरन या भ्रमित कर सहमति ली जा रही है और कई स्थानों पर बिना स्पष्ट अनुमति के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। यह उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग अपने ही बनाए कानूनों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा चार सदस्यीय समिति गठित कर 10 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है तथा 30 दिनों तक उपभोक्ताओं के कनेक्शन न काटने का निर्णय भी लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना बताते हुए गंभीर विषय बताया।उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसी प्रकार उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालती रही, तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता इसका करारा जवाब देगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
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