– अंतिम विदाई की एक झलक तक न देख सकी पत्नी, गांव की हर आंख नम
संदना/सीतापुर 27 अप्रैल (आरएनएस)। संदना क्षेत्र के सरोसा गांव में सोमवार की सुबह ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर दिल को अंदर तक झकझोर दिया। एक साथ पिता और उसके मासूम बेटे के जनाजे उठे तो पूरा गांव सिसक पड़ा। हवा में चीखें थीं, आंखों में आंसू और हर चेहरे पर दर्द साफ दिखाई दे रहा था। रविवार शाम सड़क हादसे में 27 वर्षीय संजय और उसके छह माह के मासूम पुत्र भोला शंकर की मौत हो गई थी। देर शाम जब दोनों के शव घर पहुंचे, तो संजय के आंगन में पसरा सन्नाटा सब कुछ बयां कर रहा थाकृजहां कभी बच्चे की किलकारी गूंजती थी, वहां अब मातम का साया था। सोमवार सुबह जब पिता-पुत्र को अंतिम विदाई दी गई, तो गांव का हर शख्स टूट गया। जनाजे के साथ चल रहे लोगों के कदम भारी थे, और किसी के पास सांत्वना के शब्द नहीं थे। एक ही परिवार की दो अर्थियां उठना, हर किसी के लिए असहनीय था। इस दर्दनाक घटना का सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि संजय की पत्नी गुड्डी, जो इस हादसे में गंभीर रूप से घायल है, लखनऊ के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। वह अपने पति और मासूम बेटे की अंतिम विदाई की एक झलक तक नहीं देख सकी। शायद उसे अभी तक यह भी नहीं मालूम कि उसका संसार एक पल में उजड़ चुका है। पीछे छूट गए हैं दो मासूम बच्चे 8 साल की प्रज्ञा और 6 साल का अंकुशकृजिनकी दुनिया अब सिर्फ अपनी मां पर टिकी है। पिता और छोटे भाई को खो चुके इन बच्चों की आंखों में डर, दर्द और अनिश्चित भविष्य साफ झलक रहा है। संजय के पास महज तीन बीघा खेती थी और वह मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पाल रहा था। अब उस घर की जिम्मेदारी एक ऐसी मां के कंधों पर आ गई है, जो खुद जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है। गांव में इस हादसे के बाद शोक की लहर है, लेकिन लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि इतने बड़े दुख के बावजूद कोई जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार व्यक्ति परिवार का हाल जानने नहीं पहुंचा। सरोसा का यह दर्द आज सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आईना है, जहां एक हादसा पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देता हैकृऔर पीछे छोड़ जाता है सिर्फ सन्नाटा, आंसू और अनगिनत सवाल।
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