श्रीनगर,30 अपै्रल (आरएनएस)। जम्मू कश्मीर पुलिस ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्तिजा मुफ्ती के सोशल मीडिया पर अलगाववादी नेता का महिमामंडन करने वाला एक वीडियो शेयर करने के बाद केस दर्ज किया है.
एक अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो सर्कुलेट होने पर श्रीनगर पुलिस ने साइबर पुलिस स्टेशन में अनजान लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. कुछ दिन पहले, मुफ्ती ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष स्वर्गीय सैयद अली गिलानी का एक वीडियो शेयर किया था. वह उर्दू भाषा के महत्व के बारे में बात करते दिखे थे, लेकिन कई नेटिजन्स (सक्रिय इंटरनेट यूजर्स) ने वीडियो पर आपत्ति जताई थी.
जम्मू कश्मीर भारतीय जनता पार्टी के मीडिया इंचार्ज साजिद यूसुफ शाह ने मुफ्ती के खिलाफ कश्मीर घाटी में खून-खराबे के लिए जिम्मेदार किसी व्यक्ति के वीडियो, नफरत फैलाने और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए जवाबदेही की कमी पर सवाल उठाया था.
साजिद यूसुफ शाह ने पूछा कि, अगर यही बात किसी आम आदमी ने ट्वीट की होती, तो वे सलाखों के पीछे होते. लेकिन क्या सिस्टम ऐसे ही काम करता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त वोट पाने के लिए खुली छूट मिल रही है. हमारा सिस्टम इतना चयनात्मक क्यों है.
उधर वीडियो पर मुफ्ती ने पोस्ट किया, हो सकता है कि वह गिलानी की सोच से सहमत नहीं हो सकती है, लेकिन उर्दू की अहमियत पर जोर देने वाला उनका यह पुराना वीडियो दूसरे कारणों के अलावा भी बहुत मायने रखता है…देखने लायक है.
मुफ्ती का यह वीडियो तब आया जब जम्मू कश्मीर सरकार ने नायब तहसीलदार और पटवारी पदों के लिए उर्दू की जानकारी हटाने के लिए राजस्व सेवा भर्ती नियमों के मसौदे पर आपत्तियां मांगीं, जिसके बाद मुफ्ती ने विरोध किया. यह केस भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना, दुश्मनी को बढ़ावा देना और गलत जानकारी फैलाना शामिल है.
पुलिस ने कहा, वीडियो भारत की शांति, संप्रभुता और अखंडता के लिए नुकसानदायक गैरकानूनी गतिविधियों को भड़काने के इरादे से अलगाववादी विचारधारा और गलत जानकारी का प्रचार करता है. इसलिए केस दर्ज किया गया है और जांच चल रही है. शुरुआती जांच में पता चला है कि इस तरह के सामग्री का प्रसार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अलगाववादी और अलगाववादी बातों को फैलाने की एक जानबूझकर की गई कोशिश है.
अधिकारी ने कहा, ऐसी गतिविधियों से लोगों में नाराजगी भड़क सकती है, सार्वजनिक आदेश में खलल पड़ सकता है और राष्ट्रीय एकता को कमजोर किया जा सकता है. उन्होंने ऐसी सामग्री (कंटेंट) शेयर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी.
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