गुवाहाटी,01 मई (आरएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने एक और बयान के चलते विवादों में हैं। इस बार उनके बयान से उपजा विवाद सीमा पार तक पहुंच गया है और बांग्लादेश ने ढाका में पदस्थ कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया है। बांग्लादेश ने बताया कि महानिदेशक (दक्षिण एशिया) इशरत जहां ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त को ढाका का पक्ष बताया और सरमा के बयान को बांग्लादेश-भारत संबंधों के लिए अपमानजनक बताते हुए भारत को लेकर नाराजगी जाहिर की।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह राजनयिक कदम असम से लोगों की कथित स्वदेश (बांग्लादेश) वापसी से जुड़े सरमा के बयानों के बाद उठाया गया है। बांग्लादेशी अधिकारियों ने सरमा की हालिया सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रकृति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे बयान द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतने की जरूरत पर जोर दिया।
यह विवाद 25 अप्रैल को सरमा द्वारा दिए गए एक बयान के बाद पैदा हुआ। उन्होंने कहा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और उन्हें बांग्लादेश वापस भेज दिया गया। सोशल मीडिया पर उन्होंने कथित घुसपैठियों की फोटो साझा करते हुए लिखा, लातों के भूत बातों से नहीं मानते। हम असम से ऐसे घुसपैठियों को बाहर निकालते हैं जब वे स्वयं नहीं जाते। कल रात 20 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को धक्का देकर वापस भेज दिया गया।
सरमा ने दावा किया कि आधिकारिक चैनलों के माध्यम से कथित घुसपैठियों को निर्वासित करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा, अगर मैं उन्हें आधिकारिक तौर पर वापस भेजना चाहता हूं, तो विदेश मंत्रालय से संपर्क करना होगा। मंत्रालय फिर बांग्लादेश को जानकारी भेजेगा। फिर यह बांग्लादेश पर निर्भर करेगा कि वे किसे वापस लेना चाहते हैं। सरमा ने कहा था कि वे प्रार्थना करते हैं कि भारत-बांग्लादेश संबंध में कोई विशेष सुधार न हो।
सरमा ने कहा था, जिन स्थानों पर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल नहीं हैं, वहां रात का फायदा उठाकर लोगों को वापस धकेला जा रहा है। हम उन्हें सीमा के पास सुविधाजनक स्थान पर ले जाते हैं और सचमुच उन्हें धक्का देकर सीमा पार करा देते हैं। अब असम में ऐसा माहौल बन गया है कि कई अवैध बांग्लादेशी अपनी मर्जी से वापस जाने लगे हैं। सरमा कुछ समय से कथित घुसपैठियों को धकेले जाने की तस्वीरें साझा कर रहे हैं।
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