– वीडियो ने खोली हकीकत
महोली/सीतापुर 1 मई (आरएनएस)। सरकार भले ही गौवंश संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर गौशालाओं का निर्माण करा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। महोली तहसील मुख्यालय इन दिनों आवारा पशुओं का नया ठिकाना बनता जा रहा है, जहां छुट्टा जानवर खुलेआम सड़कों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक घूमते नजर आ रहे हैं। सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी जहां हर पल हादसों को दावत दे रही है, वहीं तहसील परिसर के अंदर उनका बेखौफ घूमना प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। हाल ही में तहसील मुख्यालय के मुख्य गेट से छुट्टा जानवरों के अंदर घुसने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। महोली की नवागत एसडीएम शिखा शुक्ला ने भले ही वर्षों से जमे अधीनस्थों के क्षेत्र बदलकर सख्ती और सुधार का संदेश देने की कोशिश की हो, लेकिन जमीनी हालात उनके दावों को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महोली में ही करोड़ों की लागत से कान्हा गौशाला संचालित हो रही है, तो आखिर ये छुट्टा जानवर सड़कों और तहसील परिसर तक कैसे पहुंच रहे हैं? क्या गौशालाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं या जिम्मेदारों ने अपनी आंखें मूंद ली हैं?। स्थानीय लोगों में इसको लेकर आक्रोश है और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है। अगर समय रहते हालात नहीं सुधरे, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
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