0-राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने मजाकिया अंदाज में कहा- मैं भारत की राजनीति में दखल नहीं दे रहा, मोदी जी का प्रशंसक हूं
जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान राजधानी जकार्ता में आयोजित भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में एक हल्का-फुल्का लेकिन चर्चित घटनाक्रम देखने को मिला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने नेताओं की भाषण शैली पर मजाकिया टिप्पणी की, जिसकी सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है।
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति सुबियांतो ने मुस्कुराते हुए कहा, मैं अपना छोटा-सा भाषण समाप्त करूंगा। किसी भी राजनीतिक नेता के साथ सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि यदि उसे पोडियम और माइक्रोफोन मिल जाए तो वह वहां से हटना नहीं चाहता।
इसके तुरंत बाद उन्होंने हंसते हुए स्पष्ट किया, मैं भारत की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूं, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से नरेंद्र मोदी जी का प्रशंसक हूं। उनके इस बयान पर सभागार में मौजूद लोग और स्वयं राष्ट्रपति मुस्कुराते नजर आए।
राष्ट्रपति सुबियांतो ने अपने संबोधन में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था का सफलतापूर्वक संचालन पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा, भारत 140 करोड़ से अधिक आबादी वाला देश है, जहां अनेक जातीय समूह, भाषाएं और संस्कृतियां हैं। इसके बावजूद इतने वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से सरकारों का गठन और सत्ता का हस्तांतरण होना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया भी भारत की लोकतांत्रिक उपलब्धियों से सीख लेकर आगे बढऩा चाहता है।
राष्ट्रपति के मजाकिया बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोगों ने इसे दोनों नेताओं के बीच सहज और आत्मीय संबंधों का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक हास्य के रूप में देखा।
प्राबोवो सुबियांतो हाल ही में लोकतांत्रिक चुनाव के माध्यम से इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बने हैं। हालांकि उनकी सरकार को लेकर मानवाधिकार संगठनों और कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चिंता जताई है।
रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व सैन्य जनरल और रक्षा मंत्री रहे सुबियांतो की सरकार ने वर्ष 2025 में सैन्य कानून में संशोधन किया, जिससे सक्रिय सैन्य अधिकारियों के लिए सरकारी पदों पर नियुक्ति के अधिक अवसर उपलब्ध हुए हैं। आलोचकों का मानना है कि इससे नागरिक प्रशासन में सेना की भूमिका बढ़ सकती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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