देहरादून,01 मई (आरएनएस)। मई दिवस पर पर्यटन नगरी मसूरी में मई दिवस पर एकट एवं सीटू के नेतृत्व में श्रमिक संगठनों ने अलग अलग प्रदर्शन कर मई दिवस के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सरकार से काले श्रम कानूनों को समाप्त करने सहित श्रमिकों की मांगों को लेकर ज्ञापन भी दिया। इंटक के नेतृत्व में श्रमिकों ने लंढौर गुरूद्वारा चौक से पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ जुलूस निकाला।जुलूस घंटाघर, शहीद भगत सिंह चौक, शहीद स्थल मालरोड होते हुए गांधी चौक तक गया। इंटक अध्यक्ष आरपी बडोनी ने कहा कि आठ घंटे काम, आठ घंटे मनोरंजन व आठ घंटे आराम को लेकर अमेरिका में श्रमिकों ने शहादत दी थी। लेकिन आजाद भारत में श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सबक सिखाने के लिए तमाम श्रमिक सड़कों पर है व ईंट से ईंट बजाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि होटल श्रमिकों सहित अन्य श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 26 हजार करने, आशाओं व भोजन माताओं का भी न्यूनतम वेतन घोषित किया जाए। इस मौके पर मजदूर संघ, रेहड़ी पटरी व्यापारी, गाइड यूनियन, वाणिज्य कर्मचारी यूनियन, होटल वर्कर्स यूनियन सहित अन्य यूनियनों से जुड़े श्रमिकों ने प्रदर्शन में भाग लिया। दूसरी ओर सीटू के नेतृत्व में शहीद भगत सिंह चौक से गांधी चौक पर मई दिवस के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर प्रदेश सरकार को ज्ञापन दिया गया जिसमें मांग की गयी कि श्रमिकों का वेतन बढ़ाया जाए। होटल, स्कूल, वाणिज्य कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तीस हजार किया जाए। आशा, आंगनबाड़ी, भोजन माताओं का न्यूनतम वेतन तीस हजार किया जाए?। इनको राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। मसूरी के 121 रिक्शा श्रमिकों को गोल्फकार्ट व व विधवा महिलाओं को वेंडर जोन में समायोजित किया जाए। इस मौके पर मजदूर संघ व सहित आशा वर्कर, भोजन माता, आंगनवाडी कार्यकत्रिया आदि मौजूद रही।
साथ ही नए मोटर व्हीकल एक्ट को वापस लेने, आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। श्रमिक संगठनों ने बैंक, बीमा, रक्षा और रेलवे जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर रोक लगाने और मजदूर बस्तियों को उजाडऩे की कार्रवाई बंद करने की भी मांग की।श्रमिक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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