नई टिहरी,01 मई (आरएनएस)। गजा तहसील के घंडियाल डांडा स्थित घंटाकर्ण मंदिर में पेयजल संकट से जूझ रहे श्रद्धालुओं और मंदिर समिति को आखिरकार राहत मिल गई है। करीब डेढ़ वर्ष से ठप पड़ी पेयजल आपूर्ति अब फिर से सुचारु हो गई है। घंटाकर्ण मंदिर परिसर में पानी की कमी लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई थी। दिसंबर 2024 में पंपिंग योजना की मोटरें जलने के बाद आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई थी। घंटाकर्ण मंदिर तक पानी पहुंचाना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। वर्ष 2020 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण की पहल पर सोलर पंपिंग सिस्टम के जरिये मंदिर तक पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। इससे कुछ समय तक राहत मिली लेकिन दिसंबर 2024 में पंपिंग योजना की मोटरें जलने से पूरी व्यवस्था ठप हो गई। इसके बाद मंदिर में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई थी। इस कारण श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिर समिति को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसके चलते मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अपने साथ ही पानी लाना पड़ रहा था। मंदिर की दैनिक व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही थीं। कई बार दूरस्थ स्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ता था। स्थिति गंभीर होने पर मंदिर समिति ने गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी से पेयजल और बिजली व्यवस्था बहाल करने की मांग की। स्थानीय लोगों की मांग पर सांसद निधि से छह लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी। फरवरी 2025 में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने धनराशि जारी करते हुए घंटाकर्ण धाम ट्रस्ट को कार्यदायी संस्था के रूप में मरम्मत कार्य की अनुमति दी। ट्रस्ट की ओर से पंपिंग योजना की मरम्मत कराई गई। कखरियाली तोक के पेयजल स्रोत से करीब दो किमी लंबी खड़ी पाइपलाइन के माध्यम से पानी को टैंक तक पहुंचाया गया जहां से मंदिर तक आपूर्ति की जा रही है। घंटाकर्ण मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय प्रकाश बिजल्वाण ने बताया कि हाल ही में मंदिर में पेयजल आपूर्ति फिर से सुचारु हो गई है जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को राहत मिली है। इसके साथ ही मंदिर में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तीन किलोवाट का सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

