माल्दा। विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले मोथाबाड़ी कांड ने नया मोड़ ले लिया है। न्यायिक अधिकारियों के साथ कथित बदसलूकी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तृणमूल कांग्रेस के कई प्रभावशाली नेताओं और कार्यकर्ताओं को तलब किया है। उन्हें रविवार को कालियाचक थाने में पेश होने का निर्देश दिया गया था। समन पाने वालों में सुजापुर की तृणमूल उम्मीदवार सबीना यास्मीन के चुनावी एजेंट अब्दुल रहमान शामिल हैं, जो जिला परिषद में वन एवं भूमि विभाग के कर्माध्यक्ष भी है। इसके अलावा कालियाचक एक ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष मोहम्मद सरिउल को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। शनिवार देर रात इन नेताओं को नोटिस दिया गया।
गौरतलब है कि, पिछले महीने मोथाबाड़ी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों को घेरकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। आरोप है कि सूची से नाम हटने को लेकर नाराज भीड़ ने सात अधिकारियों को देर रात तक रोके रखा और उनके साथ दुव्र्यवहार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने जांच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया था। इससे पहले क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) इस मामले में मुख्य आरोपित मोफक्केरुल इस्लाम समेत 52 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें से कई फिलहाल एनआईए की हिरासत में हैं।
मतगणना से कुछ घंटे पहले सत्ताधारी दल के नेताओं को तलब किए जाने से माल्दा जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई का चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ता है।तृणमूल उम्मीदवार सबीना यास्मीन ने इन समन के समय की निंदा करते हुए स्थिति को “बेहद दुखद” बताया और केंद्रीय एजेंसियों पर निम्नतम स्तर पर पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम घोषित होने से ठीक पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने और राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए एनआईए का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। यास्मीन ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि संबंधित घटना मोथा बाड़ी विधानसभा क्षेत्र में हुई, लेकिन जिन नेताओं को समन भेजा गया है वे सुजापुर से हैं, जो मतगणना प्रक्रिया के दौरान उनकी उपस्थिति को कमजोर करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।
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