सीतापुर 4 मई (आरएनएस)। जनपद के बिजवार क्षेत्र में स्थित वर्षों से बंद पड़ी प्लाईवुड फैक्ट्री से जुड़े बहुचर्चित भूमि विवाद में जिलाधिकारी न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए करीब 71 बीघा जमीन को राज्य सरकार में निहित (वेस्ट) करने का आदेश दिया है। कोर्ट द्वारा जारी 61 पृष्ठों के विस्तृत आदेश को फैक्ट्री गेट पर चस्पा कर दिया गया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में इस निर्णय की व्यापक चर्चा हो रही है। यह फैक्ट्री वर्ष 1939 से 1999 तक संचालित रही, लेकिन इसके बाद बंद हो गई थी। फैक्ट्री बंद होने के बाद से ही जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद लगातार बना हुआ था। इसी क्रम में फरवरी 2026 में कानपुर निवासी आबिद, आदिल व सीमा जफरुल्ला ने मालिकाना हक का दावा करते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तुत दस्तावेजों की गहन जांच की, जिसमें कई गंभीर खामियां और तथ्यों में विसंगतियां पाई गईं। इन कमियों के चलते अदालत ने अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फैक्ट्री के विदेशी स्वामी हेनरी थॉमसन के भारत छोडऩे के बाद यह संपत्ति ‘बोना वेकेंटियाÓ (स्वामीविहीन संपत्ति) की श्रेणी में आ गई थी। ऐसे मामलों में कानूनन संपत्ति स्वत: राज्य सरकार के अधीन चली जाती है, इसलिए किसी भी निजी व्यक्ति या संस्था का दावा वैध नहीं ठहराया जा सकता। सुनवाई के दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा संपत्ति पर बंधक होने का दावा किया गया, जबकि श्रमिक संगठन ने 10 करोड़ रुपये से अधिक बकाया भुगतान की मांग रखी। हालांकि न्यायालय ने दोनों दावों को अस्वीकार करते हुए कहा कि जब मूल स्वामित्व ही संदेहास्पद है, तो उस पर आधारित कोई भी वित्तीय या कानूनी दावा मान्य नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, इस भूमि पर हाल के दिनों में प्लाटिंग की तैयारी भी चल रही थी। लेकिन डीएम कोर्ट के इस फैसले ने ऐसे सभी प्रयासों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने एनएचएआई द्वारा पूर्व में दिए गए मुआवजे की वसूली के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं। इस निर्णय को प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल सरकारी भूमि पर अवैध दावों पर रोक लगेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक सख्त मिसाल भी स्थापित होगी।
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जानिए: क्या है ‘बोना वेकेंटियाÓ?
बोना वेकेंटियाÓ एक कानूनी सिद्धांत है, जिसके तहत यदि कोई संपत्ति बिना वैध स्वामी के रह जाती है जैसे मालिक की मृत्यु हो जाए या वह देश छोड़ दे और कोई उत्तराधिकारी न होकृतो वह संपत्ति स्वत: राज्य सरकार के अधिकार में चली जाती है।
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फैक्ट्री से जुड़ी प्रमुख बातें
स्थापना: 1939
बंद होने का वषर्: 1999
कुल विवादित भूमि: लगभग 71 बीघा
आदेश: डीएम न्यायालय, सीतापुर
वर्तमान स्थिति: राज्य सरकार में निहित
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