लखनऊ 8 जुलाई (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय का 11वां दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में कुल 1,246 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 125 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान किए गए। इनमें 74 पदक छात्राओं और 51 पदक छात्रों को मिले, जो उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। सभी विद्यार्थियों की उपाधियां और अंकपत्र डिजिलॉकर के माध्यम से भी उपलब्ध कराए गए।दीक्षांत समारोह के दौरान सामाजिक सरोकार से जुड़े कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। जनपद औरैया के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 250 आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं, वहीं 300 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण भी कराया गया।इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता के पीछे माता-पिता का त्याग, संघर्ष और स्नेह तथा शिक्षकों का मार्गदर्शन सबसे बड़ी शक्ति होती है। भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव” का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।उन्होंने पदक विजेताओं से कहा कि उन्होंने अधिक परिश्रम कर यह उपलब्धि हासिल की है, इसलिए अब उन्हें समाज और देश के लिए प्रेरणा बनने की जिम्मेदारी निभानी होगी। वहीं जो विद्यार्थी इस बार पदक प्राप्त नहीं कर सके, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि निरंतर संघर्ष और सतत प्रयास ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता।”योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि व्यक्ति अपने जीवन में घटनाओं, अनुभवों, लोगों और प्रकृति से भी निरंतर सीखता रहता है।उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के साथ लगातार बैठकों और मार्गदर्शन के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक ग्रेडेड विश्वविद्यालयों वाला राज्य बन चुका है। प्रदेश के कई विश्वविद्यालय राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) की उच्च श्रेणियों में शामिल हैं, जबकि कई विश्वविद्यालय यूजीसी ग्रेड-1 का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। इसके अलावा प्रदेश के विश्वविद्यालय विश्व और एशिया की प्रतिष्ठित रैंकिंग में भी स्थान बना रहे हैं।अपने संबोधन के अंत में योगेंद्र उपाध्याय ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की सकारात्मक सोच, नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

