लखनऊ 8 जुलाई (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश में नकली और स्प्यूरियस (जाली) दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कसते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने व्यापक अभियान के तहत लखनऊ और वाराणसी में बड़ी कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान लाखों रुपये मूल्य की संदिग्ध नकली एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा अंतरजनपदीय नकली दवा नेटवर्क की आशंका के बीच जांच तेज कर दी गई है। इसके साथ ही प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर 25 दवा फर्मों की जांच की गई, 52 दवाओं के नमूने लिए गए और नियमों के उल्लंघन पर 12 फर्मों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, 6 जुलाई की रात लखनऊ के आलमबाग बस स्टेशन के निकट मेट्रो स्टेशन के पास एक गत्ते के कार्टन से बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकली एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। बरामद दवाओं में एक प्रतिष्ठित कंपनी के 4800 टैबलेट तथा दूसरी प्रसिद्ध कंपनी की 2940 टैबलेट शामिल थीं। इन दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 1.60 लाख रुपये बताई गई है।प्रारंभिक जांच में दवाओं की पैकिंग, प्रिंटिंग और स्ट्रिप्स में कई गंभीर त्रुटियां पाई गईं। मूल उत्पाद से तुलना करने पर स्पष्ट हुआ कि ये दवाएं नकली (स्प्यूरियस) हैं। मौके से वाराणसी निवासी विमल कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने ये दवाएं वाराणसी स्थित न्यू सर्जिकल नामक प्रतिष्ठान से बिना बिल और बिना वैध लाइसेंस के खरीदकर लखनऊ भेजी थीं। इस मामले में आलमबाग थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।लखनऊ से मिली जानकारी के आधार पर उसी दिन वाराणसी के मडुवाडीह थाना क्षेत्र स्थित चौधरी कटरा में संचालित न्यू सर्जिकल पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। जांच के दौरान दुकान में बिना वैध औषधि लाइसेंस के भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का अवैध भंडारण पाया गया। दुकान संचालक संदीप श्रीवास्तव को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने दवाएं प्रयागराज निवासी संजय सिंह चौहान तथा वाराणसी निवासी गौरव शर्मा से खरीदी थीं। मौके से 12 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए, जबकि करीब 25 लाख रुपये मूल्य की शेष दवाओं को जब्त कर सील कर दिया गया। इस मामले में भी मडुवाडीह थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।विभाग का मानना है कि दोनों मामलों के तार ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाओं के अंतरजनपदीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पूरे रैकेट की जांच की जा रही है और दोषी व्यक्तियों तथा फर्मों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत सक्षम न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने लखनऊ की दवा मंडी अमीनाबाद, ट्रांसपोर्ट नगर तथा अन्य क्षेत्रों में विशेष संयुक्त अभियान चलाया। प्रदेशभर से 18 औषधि निरीक्षकों की टीम गठित कर तेजी से बिकने वाली दवाओं, नकली ब्रांड, एक्सपायरी दवाओं की री-लेबलिंग, सरकारी आपूर्ति की दवाओं की अवैध बिक्री तथा फिजिशियन सैंपल्स के व्यावसायिक उपयोग की जांच की गई।विशेष अभियान के दौरान 25 दवा फर्मों और उनके गोदामों का गहन निरीक्षण किया गया। जांच में कई प्रतिष्ठानों द्वारा दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। ऐसे मामलों में लगभग 1.77 लाख रुपये मूल्य की दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई।जांच टीम ने 52 संदिग्ध दवाओं के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए एकत्र किए हैं। वहीं, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियमावली, 1945 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर 12 दवा फर्मों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और आपूर्ति करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन को जड़ से समाप्त कर आम नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराना है।
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