लखनऊ, 04 मई 2026। प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधानसभा स्थित समिति कक्ष में उच्चस्तरीय बैठक कर पशुपालन एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को गोबर से कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन, उपयोग और विपणन को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को पुनस्र्थापित करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर बड़े पैमाने पर जैविक खाद का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि गौशालाओं को उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित कर उन्हें कम्पोस्ट, जीवामृत और अन्य जैविक उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जाए।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में लाखों मीट्रिक टन कम्पोस्ट उत्पादन की क्षमता मौजूद है, जिसके लिए गोशालाओं, डेयरी इकाइयों और किसानों के स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने झांसी, चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर और बाराबंकी में संचालित सफल बायोगैस और जैविक खाद मॉडलों का उल्लेख करते हुए उनके राज्यव्यापी विस्तार के निर्देश दिए।
बैठक में कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों के विस्तार, गोबर गैस प्लांट्स की स्थापना और कृषि अपशिष्ट के बेहतर उपयोग पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि बायोगैस से ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ उससे निकलने वाला स्लरी खेतों के लिए उपयोगी जैविक खाद के रूप में किसानों को दोहरा लाभ देगा।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोबर आधारित खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उसका मानकीकरण किया जाए। पैकेजिंग, नमी स्तर और गुणवत्ता के स्पष्ट मानक तय किए जाएं, ताकि किसानों को विश्वसनीय उत्पाद मिल सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से इसकी उपलब्धता बढ़ाने और यूरिया के साथ इसके संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि गोबर आधारित खाद मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाकर उत्पादन क्षमता को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करती है। इस दिशा में वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को जोड़ते हुए कम लागत वाले मॉडल विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में गोबर गैस संयंत्रों की स्थापना को बढ़ावा देने और जैविक खाद के प्रभावी विपणन की व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी, ताकि उत्पाद किसानों तक आसानी से पहुंचे और उन्हें बेहतर मूल्य मिल सके।
मंत्री ने कहा कि कृषि और पशुपालन के एकीकरण के माध्यम से जैविक खेती को नई दिशा दी जा रही है। गोबर आधारित उत्पादों के व्यापक उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी।

