मंच पर राहत, जमीन पर किसान बेहाल
सुलतानपुर 5 मई (आरएनएस )। विकास भवन के प्रेरणा सभागार में आज किसानों के जख्मों पर मरहम कम और नमक ज्यादा छिड़कने का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। एमएलसी शैलेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के नाम पर राहत का ऐसा तमाशा हुआ जिसमें असली से ज्यादा डमी चेक चमकते नजर आए।
चुनिंदा किसानों को हजारों की रकम के डमी चेक देकर कैमरों के सामने मुस्कुराहटें बिखेरी गईं। शिवपाल सिंह गॉधी को ?63,369, उर्मिला देवी को ?31,644, हरीश चन्द्र तिवारी को ?58,600 और राम सिंह को ?49,925। मानो इन चेकों से किसानों की बरसों की बदहाली एक झटके में खत्म हो जाएगी। असल सवाल ये है कि क्या ये राहत है या सिर्फ फोटो खिंचवाने का बहाना। कहा गया कि पैसा सीधे खातों में भेज दिया गया लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि छोटे और गरीब किसान अब भी कागजों और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। बड़े काश्तकारों तक रकम पहुंचने में फुर्ती और छोटे किसानों के लिए सिर्फ प्रक्रिया जारी है का रटा-रटाया जवाब। वाह रे सिस्टम! 147 किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया लेकिन हजारों प्रभावित किसानों की भीड़ में ये संख्या ऊंट के मुंह में जीरे से भी कम है। बाकी किसान शायद इस व्यवस्था की नजर में आते ही नहीं या फिर उनके दर्द की कोई प्रेस वैल्यू नहीं है। कार्यक्रम में अधिकारी बीमा कंपनी के प्रतिनिधि और भाषणों की लंबी कतार रही। बस नहीं था तो किसानों की असली परेशानी का कोई ठोस समाधान। निष्कर्ष साफ है सरकार मंच पर राहत बांट रही है और जमीन पर किसान अब भी अपने हाल पर आंसू बहा रहा है।
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