बलौदाबाज़ार, 05 मई (आरएनएस)। भीड़ के बीच अचानक उठी एक आवाज—मोबाइल पर आया मैसेज भी अपराध हो सकता है और बस यहीं से शुरू हुआ गातापार गांव का सबसे अलग दिन, जहां आज अपराध की कहानी नहीं बल्कि उसे रोकने की रणनीति लिखी जा रही थी, थाना पलारी पुलिस की टीम जब गांव में पहुंची तो माहौल सामान्य था लेकिन कुछ ही देर में सभा एक मिशन में बदल गई, सामने खड़े थे थाना प्रभारी निरीक्षक परिवेश तिवारी, जिन्होंने सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े साइबर अपराध के खतरे को खोलकर रख दिया, हर उदाहरण ऐसा कि गांव का हर शख्स खुद को उस कहानी में देखने लगा, किसी का मोबाइल, किसी का बैंक खाता, हर किसी के लिए चेतावनी साफ थी कि एक क्लिक जिंदगी भर की कमाई ले जा सकता है, लेकिन बात यहीं नहीं रुकी, माहौल ने अचानक दूसरा मोड़ लिया जब चर्चा नशे पर पहुंची, गांव के बीच बैठकर खुली बातचीत हुई, हर चेहरे पर चिंता और हर जवाब में एक संकल्प झलकने लगा, नशे के जाल को तोडऩे के लिए पूरा गांव एक साथ खड़ा नजर आया, और तभी सबसे बड़ा ट्विस्ट सामने आया—गांव की महिलाओं ने खुद आगे बढ़कर महिला कमांडो बनाने का फैसला लिया, एक ऐसा कदम जो सिर्फ बात नहीं बल्कि कार्रवाई का संकेत था, अब गांव की गलियों पर नजर सिर्फ पुलिस की नहीं बल्कि खुद गांव की महिलाओं की भी होगी, पंचायत, सरपंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में यह कार्यक्रम धीरे-धीरे एक अभियान में बदल गया, जहां हर व्यक्ति ने अपराध मुक्त गांव बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली, यह सब कुछ एसपी ओमप्रकाश शर्मा के निर्देशन में शुरू हुई पहल का हिस्सा था, जो अब गांव-गांव में असर दिखा रही है, बहरहाल यह तस्वीर साफ है कि जब पुलिस और जनता एक साथ खड़ी हो जाए तो अपराध खुद रास्ता बदल लेता है, क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है और जो जाग गया वही सुरक्षित है।
०
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

