बीजापुर, 07 मई (आरएनएस)। कभी नक्सल दहशत और बंदूकों की गूंज से सहमा रहने वाला बीजापुर का मारूड़बाका गांव अब पुलिस और ग्रामीणों के भरोसे, खेल, शिक्षा और विकास की नई कहानी लिखता नजर आया, जहां थाना उसूर पुलिस ने सिविक एक्शन कार्यक्रम और चलित थाना लगाकर सीधे गांव के बीच पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं, युवाओं को भविष्य का रास्ता दिखाया और महिलाओं-बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को जरूरत का सामान बांटकर भरोसे की मजबूत डोर बांध दी। बीजापुर जिले के थाना उसूर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मारूड़बाका में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऑप्स रविंद्र कुमार मीणा, एसडीओपी आवापल्ली तिलेश्वर प्रसाद यादव, थाना प्रभारी उसूर, थाना प्रभारी आवापल्ली समेत पुलिस और कार्यपालिक बल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से खुलकर संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि वर्षों तक नक्सलियों ने विकास कार्यों में बाधा डालकर गांवों को सड़क, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा तथा अवैध लेवी वसूली कर अपने स्वार्थ साधे, लेकिन अब नक्सल उन्मूलन के बाद शासन की योजनाओं का लाभ सीधे गांव तक पहुंच रहा है। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को पढ़ाई, खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया और ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल और आंगनबाड़ी भेजें, जहां शिक्षा के साथ भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीणों को नक्सलवाद के बहकावे से दूर रहने की समझाइश दी गई और यह भी बताया गया कि मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित माओवादी अब सम्मानजनक रोजगार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं।
पुलिस ने ग्रामीणों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी तुरंत नजदीकी थाना, सुरक्षा कैंप या अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील भी की। कार्यक्रम के दौरान गांव के युवाओं को क्रिकेट, वॉलीबॉल और बैडमिंटन की खेल सामग्री व ड्रेस वितरित की गई, महिलाओं को साडिय़ां, बच्चों को लूडो और बुजुर्गों को चप्पल देकर सहयोग किया गया। पूरे आयोजन में गांव का उत्साह साफ दिखाई दिया और समापन पर करीब 300 से 400 ग्रामीणों को भोजन भी कराया गया। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास जताते हुए क्षेत्र में शांति, विकास और सुरक्षा बनाए रखने में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। बहरहाल, मारूड़बाका की यह तस्वीर साफ संकेत दे रही है कि जहां कभी डर का साया था, वहां अब विकास, विश्वास और बदलाव की नई सुबह दस्तक दे चुकी है।
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