श्रावस्ती,07 मई (आरएनएस)। भखला नदी में नहाना पांच बच्चों और युवकों के लिए जानलेवा साबित हुआ। थाना कोतवाली भिनगा क्षेत्र के भिनगा-बहराइच मार्ग स्थित भखला नदी में बृहस्पतिवार दोपहर नहाने गए पांच बच्चों में से दो की डूबकर मौत हो गई, जबकि तीन बच्चों को स्थानीय गोताखोरों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार गिलौला थाना क्षेत्र के घोरमा परसिया गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कुछ बच्चे और युवक रिश्तेदारी में आए हुए थे। दोपहर के समय सभी लोग गांव से करीब नौ किलोमीटर दूर स्थित भखला नदी में नहाने चले गए। नदी में उतरते ही अचानक सभी गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद अभिषेक पुत्र गुड्डू (16) निवासी घोरमा परसिया थाना गिलौला, राहुल पुत्र श्यामू (16) निवासी मरौचा जनपद बहराइच तथा विनय पुत्र नकछेद जायसवाल (22) निवासी भगवानपुर करनैलगंज जनपद गोण्डा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। तीनों की हालत बिगडऩे पर उन्हें तत्काल जिला अस्पताल भिनगा भेजा गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। वहीं प्रेम प्रकाश पुत्र शिव पूजन (16) निवासी मरौचा जनपद बहराइच और अभि पुत्र राम प्रसाद (15) निवासी घोरमा परसिया थाना गिलौला गहरे पानी में समा गए। सूचना मिलते ही थाना कोतवाली भिनगा और सोनवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों बच्चों की तलाश शुरू कराई, लेकिन देर शाम तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।घटना की सूचना पर सीओ भिनगा भरत पासवान और एसडीएम भिनगा आशीष भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया। अधिकारियों ने गोताखोरों को तलाश अभियान तेज करने के निर्देश दिए। हादसे के बाद नदी किनारे भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इस दर्दनाक घटना के बाद जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। श्रावस्ती बाढ़ प्रभावित जिला होने के बावजूद नदी किनारे सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जिले में स्थायी रूप से न तो एनडीआरएफ और न ही एसडीआरएफ की कोई टीम तैनात है। हादसा होने पर देवीपाटन मंडल मुख्यालय गोण्डा से एसडीआरएफ टीम बुलानी पड़ती है, जिसे पहुंचने में चार से पांच घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में शुरुआती राहत और बचाव कार्य स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों के भरोसे ही चलता है। लगातार हो रही डूबने की घटनाओं के बावजूद प्रशासन द्वारा नदी घाटों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा बैरिकेडिंग और बचाव उपकरणों की समुचित व्यवस्था न किए जाने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे यदि समय रहते पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और बचाव दल मौजूद हों तो शायद नदी में डूबे लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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