सिरसा 10 मई (आरएनएस)। महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेद मंत्र की व्याख्या करते हुए बताया कि वेदों के बिना ज्ञान नहीं, अगर वेदों का ज्ञान नहीं तो भक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि आर्यसमाज के नियम तीन में लिखा है कि वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक है। वेद का पढऩा पढ़ाना, सुनना सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है। ये शब्द आर्य समाज बेगू रोड स्थित सिरसा के कार्यकारी प्रधान भूप सिंह गहलोत ने साप्ताहिक के हवन यज्ञ व वैदिक सत्संग के अवसर पर कहे। उन्होंने बताया कि वेद शब्द का अर्थ है ज्ञान। वेद ईश्वरीय ज्ञान है। वेद किसी धर्म, जाति, संप्रदाय या देश के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण मानव मात्र के लिए है। उन्होंने बताया कि वेद द्वारा ईश्वर ने मानव मात्र को शिक्षा दी है कि वह किस भांति अपने जीवन को उत्तम और सुखी बनाकर अपने अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। वेद परमेश्वर का उपदेश है, संदेश है, आदेश है। वेद सबसे बड़ा ज्ञान का भंडार है, विज्ञान का स्रोत है। वेद के अनुसार मनुष्य अपने मानवीय गुणों को समझकर उन्हें धारण कर ले तो सारी समस्यों का हल हो जाए। उन्होंने कहा कि विश्व शांति का एक मात्र मार्ग है वेद। आज के हवन के यज्ञ ब्रह्मा योगार्थी कुलदीप सिंह थे। यजमान कौशल्या आर्या थी। सभा की अध्यक्षता विजयपाल सैनी ने की। इस अवसर पर विजयपाल सैनी व डॉ. राजकुमार निजात ने भी अपने विचार रखे। अंत में शांति पाठ व प्रसाद वितरण के साथ सभा का समापन किया गया।
सिरसा। 10 मई फोटो: 11
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