बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान पकड़ा गया झूठ, एफआईआर दर्ज
प्रयागराज 10 मई (आरएनएस)। नैनी में 508 आर्मी बेस वर्कशॉप में चल रही सीधी भर्ती में दो अभ्यर्थी फर्जी डॉक्युमेंट्स के जरिए शामिल हुए। बायोमैट्रिक जांच के दौरान उनका खेल पकड़ा गया। इस मामले में नैनी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। फिलहाल आरोपियों को मुचलका भराकर छोड़ दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेना प्रशासन की ओर से पुलिस को बताया गया, 08 मई को भर्ती प्रक्रिया के दूसरे चरण के दौरान अभ्यर्थियों का बायोमैट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इसी दौरान अधिकारियों को दो अभ्यर्थियों की पहचान पर संदेह हुआ। जांच में सामने आया कि दोनों व्यक्ति वर्ष 2025 की भर्ती परीक्षा में भी शामिल हुए थे, लेकिन उस समय उनकी पहचान अलग थी। रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 में एक अभ्यर्थी ने अपना नाम संदीप पैलवार, जन्मतिथि 02 जून 2006 और पिता का नाम वीरेन्द्र सिंह बताया था। दूसरे अभ्यर्थी ने अपना नाम सुनील, जन्मतिथि 20 जनवरी 1993 और पिता का नाम निरोत्तम दर्ज कराया था।
इस बार नए नाम, अलग आधार नंबर के साथ पहुंचे वर्ष 2026 की भर्ती प्रक्रिया में यही दोनों व्यक्ति अलग पहचान के साथ शामिल हुए। इस बार पहले अभ्यर्थी ने अपना नाम राहुल और पिता का नाम मान सिंह बताया, जबकि दूसरे ने भरत पाल और पिता का नाम रणबीर सिंह दर्ज कराया। दोनों ने नए आधार नंबर भी प्रस्तुत किए। बायोमैट्रिक मिलान और दस्तावेज जांच के दौरान फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर भर्ती बोर्ड ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की और नैनी पुलिस को तहरीर भेजी।
आर्मी बेस वर्कशॉप प्रशासन की ओर से भेजी गई तहरीर में कहा गया कि दोनों अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर बदली हुई पहचान के साथ परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होने का प्रयास किया। इसे सशस्त्र बलों की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित करने वाला गंभीर मामला बताया गया है। तहरीर में दोनों अभ्यर्थियों के लिखित बयान भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं।
मामले में ग्रुप कैप्टन कौशिक पोद्दार, महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) की ओर से नैनी थाने को तहरीर दी गई। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने दोनों अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दस्तावेज और बायोमैट्रिक रिकॉर्ड की जांच शुरू पुलिस अब भर्ती प्रक्रिया में जमा किए गए दस्तावेज, आधार विवरण और बायोमैट्रिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि अभ्यर्थियों ने फर्जी पहचान कैसे तैयार की और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भी भूमिका है।
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