प्रयागराज1 0 मई (आरएनएस)। जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में मुनि श्री 108 वासुपूज्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 अतुल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में परोपकार, दया और मानव सेवा के महत्व पर विस्तृत प्रवचन हुए। प्रवचन सुनने के लिए शहर सहित बाहर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंज्हवा, सराय अकिल, कोहड़ार तथा महाराष्ट्र के सांगली से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति विशेष रही।
मुनि श्री वासुपूज्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं का कल्याण नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को दूर करना और परोपकार के मार्ग पर चलना है। उन्होंने कहा कि दया, करुणा और सेवा ही भारतीय संस्कृति एवं जैन धर्म की आत्मा हैं।
मुनि श्री अतुल सागर जी महाराज ने कहा कि लाख करो पूजा-पाठ, तीर्थ हजार, परोपकार न करने वालों का जीवन बेकार।
उन्होंने कहा कि केवल धार्मिक अनुष्ठान ही पर्याप्त नहीं हैं, जब तक मनुष्य के भीतर दया, सेवा और सह-अस्तित्व की भावना न हो। जैन धर्म “जीयो और जीने दो” तथा “अहिंसा परमो धर्म” का संदेश देकर समस्त जीवों के प्रति करुणा रखने की प्रेरणा देता है।
सायंकाल मंदिर परिसर में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम एवं आरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने धर्म से जुड़े प्रश्न पूछे और मुनिश्री ने सरल एवं सारगर्भित उत्तर देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया।
हर रविवार की भांति भक्तामर स्तोत्र विधान एवं विश्व शांति के लिए शांतिधारा का आयोजन भी किया गया। आज की शांतिधारा के कर्ता परिवार श्री राजेश जैन, दीपक जैन (ललितपुर) एवं अमित जैन परिवार रहे।
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