देहरादून,11 मई (आरएनएस)। संस्कृतिकर्मी अशोक जमनानी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल प्राचीन ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने छात्रों से आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक जड़ों से जुडऩे का आह्वान किया। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की ओर से प्रथम व्याख्यान में उपन्यासकार, कवि और संस्कृतिकर्मी अशोक जमनानी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने छात्रों को अशोक जमनानी की रचनाओं से छात्र- छात्रों को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि संस्कृतिकर्मी अशोक जमनानी को साहित्य और समाज सेवा के लिए साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश का वीरसिंह जूदेव राष्ट्रीय पुरस्कार, साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश का दुष्यंत कुमार पुरस्कार, सिंधी साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश का कृति पुरस्कार, केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पुरस्कार, केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा आथर्स ट्रेवल ग्रांट, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा मुंशी प्रेमचंद सम्मान से नवाजा जा चुका है।
इस अवसर पर वित्त नियंत्रक बिक्रम जंतवाल व निदेशक, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान से डॉ. मनोज कुमार पांडा ने अशोक जमनानी को स्मृति चिन्ह दिया।कार्यक्रम का संचालन अदिति सिंह ने किया। कार्यक्रम में डॉ. विशाल रामोला, डॉ. शिल्पी मित्तल पंवार, केसी. मिश्रा कार्यक्रम, अंशु सिंह, डॉ. वर्तिका पंत, श्रद्धा सैनी व शिक्षक मौजूद रहे।
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