०हाईकोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी मानी थी, मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित
बिलासपुर,12 मई (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पीएससी 2003 भर्ती घोटाले में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे और अन्य संबंधित पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है।यह मामला वर्ष 2003 की राज्य लोक सेवा आयोग भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चयन में गड़बड़ी से जुड़ा है। वर्षा डोंगरे ने वर्ष 2006 में इस भर्ती को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में अपने फैसले में चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अंकों की हेराफेरी को सही माना था। कोर्ट ने राज्य सरकार को चयन सूची संशोधित कर नई सूची जारी करने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट के फैसले को चंदन त्रिपाठी सहित अन्य चयनित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। तब से यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है।अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के प्रयास के तहत विशेष लोक अदालत आयोजित की जा रही है। इसके लिए वर्षा डोंगरे, राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों को मुंगेली एवं कबीरधाम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे का कहना है कि हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था और राज्य सरकार को उस आदेश का पालन करना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में समझौते की कोई संभावना नहीं है और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट से ही होना चाहिए।एसीबी जांच और हाईकोर्ट के फैसले में कई नियुक्तियों को नियमों के विपरीत बताया गया था। आरोप था कि कई अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि पात्र उम्मीदवार चयन से बाहर रह गए। अदालत ने यह भी माना था कि इंटरव्यू के लिए अयोग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया।बताया जा रहा है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार दोबारा चयन सूची जारी होती, तो कई अधिकारियों की नियुक्तियां प्रभावित हो सकती थीं। इनमें कुछ अधिकारी वर्तमान में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं।
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