अयोध्या 13 मई (आरएनएस)। वामदलों ने केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नए रोजगार गारंटी कानून (वीबी-ग्रामजी) को लागू करने के लिए सोमवार (11 मई) को जारी अधिसूचना पर आपत्ति प्रकट की है। अधिसूचना के अनुसार नया कानून एक जुलाई से लागू हो जाएगा और मनरेगा की जगह लेगा। भाकपा जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी एवं भाकपा (माले) जिला प्रभारी अतीक अहमद ने कहा कि नए कानून को लागू करने के लिए भाजपा सरकार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों का इंतजार था। नया कानून ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा से मिले रोजगार के कानूनी अधिकार से वंचित करता है। इसलिए यह अपनी अंतर्वस्तु में मजदूर-विरोधी है। नए कानून के नाम में श्गारंटीश् शब्द और वर्ष भर में रोजगार 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान सिर्फ छलावा है। मुख्य आपत्ति यह है कि किसी राज्य के किसी इलाके में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की जरुरत है – यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। यानी केंद्र जब चाहेगा, तभी किसी राज्य या क्षेत्र में नए कानून के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। जबकि मनरेगा का चरित्र सार्वभौमिक था और किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों, मजदूरों की मांग पर रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी। नेताओं ने कहा कि यह अधिसूचना तमाम ग्रामीण मजदूर संगठनों, राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक आवाजों को अनसुना कर जारी की गई है। मांग यह उठ रही है कि मनरेगा को खत्म करने के बजाय उसे और मजबूत बनाकर – वर्ष भर में 200 दिन काम और 700 रु दैनिक मजदूरी का प्रावधान कर – लागू रहने दिया जाए। नया कानून यानी वीबी- ग्रामजी मनरेगा की तुलना में बहुत कमजोर कानून है, इसलिए ग्रामीण मजदूरों के हित में है कि यह मनरेगा का स्थान न ले। नए कानून को लागू न किया जाए और अधिसूचना वापस ली जाए। वामदलों के नेताओं ने कहा कि मनरेगा को बनाये रखने और वीबी ग्रामजी कानून को रद्द करने की मांग पर आगामी 15 मई को देश भर में ग्रामीण हड़ताल होगी, जिसका आह्वान अखिल भारतीय ग्रामीण मजदूर संगठनों, केंद्रीय मजदूर संघों, मनरेगा संघर्ष मोर्चा आदि ने मिलकर किया है। वामदलों ने 15 मई को ग्रामीण हड़ताल का समर्थन किया है।
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