-विद्यार्थियों ने रंगों से गढ़े आकर्षक टेक्सचर
अयोध्या 13 मई (आरएनएस)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग एवं राज्य ललित कला अकादमी संस्कृति विभाग, उ. प्र. द्वारा आयोजित 20 दिवसीय श्ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशालाश् के छठे दिन छात्र-छात्राओं ने कैनवास पर आधुनिक और पारंपरिक कला के समन्वय को उतारा। आज का मुख्य आकर्षण श्नाइफ पेंटिंगश् का प्रयोगात्मक सत्र रहा, जिसमें रंगों के साहसिक प्रयोगों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिविर का अवलोकन करने पहुंचे आई.टी. संस्थान आवासीय परिसर के प्रशांत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों के डिजिटल युग में कला के प्रति जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने कहा ष्वर्तमान दौर में कला का तकनीक के साथ जुडऩा अनिवार्य है। आज के छात्र जो कैनवास पर नाइफ और रंगों के जरिए टेक्सचर बनाना सीख रहे हैं, यही समझ आगे चलकर उन्हें डिजिटल स्कल्प्टिंग और ग्राफिक डिजाइनिंग में अद्वितीय बनाएगी। भविष्य में इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को श्डिजिटल एसेटश् और एनएफटी के रूप में भी संरक्षित किया जा सकता है। विश्वविद्यालय का सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, ललित कला विभाग के साथ मिलकर एक श्डिजिटल आर्ट आर्काइवश् बनाने की दिशा में विचार कर रहा है, जिससे इन क्षेत्रीय और पारंपरिक विषयों को वैश्विक डिजिटल बाजार में स्थान मिल सके। शिविर की संयोजक डॉ. सरिता द्विवेदी ने कार्यशाला की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए नए आयामों पर चर्चा की। कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह के दूरगामी विजन के तहत इस कार्यशाला का स्वरूप केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक श्क्रिएटिव इनक्यूबेशन सेंटरश् के रूप में उभर रहा है। हमारा प्रयास है कि छात्र कला की तकनीकी बारीकियों को सीखकर पेशेवर जगत की चुनौतियों के लिए तैयार हों। यहाँ तैयार हो रही हर पेंटिंग विद्यार्थी के बढ़ते आत्मविश्वास और उनकी स्वरोजगार की दिशा में बढ़ते कदमों की कहानी कह रही है।ष् आयोजन सचिव एवं मुख्य प्रशिक्षक डॉ. रीमा सिंह ने कार्यशाला में नाइफ पेंटिंग और इम्पैस्टो तकनीक का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने ब्रश के बजाय पैलेट नाइफ से रंगों की मोटी परतों के जरिए त्रि-आयामी 3 डी प्रभाव पैदा करना सिखाया। डॉ. सिंह ने श्कलर पैलेट मैनेजमेंटश् और श्लाइट एंड शैडोश् के खेल को समझाते हुए बताया कि कैसे एक छोटा सा नाइफ स्ट्रोक पूरे चित्र की गहराई को बदल सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ष्नाइफ पेंटिंग केवल रंगों को थोपना नहीं है, बल्कि यह रंगों के साथ श्मूर्तिकलाश् जैसा अनुभव है। यह कलाकार की भावनाओं को सीधे और प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। साथ ही उन्होंने भारतीय लघु चित्रकला की सूक्ष्म रेखाओं और पारंपरिक अलंकरणों के बारे में भी महत्वपूर्ण टिप्स दिए। इस विशेष सत्र में प्रो. सुरेंद्र मिश्र एवं प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रो. प्रिया कुमारी, डॉ. अलका श्रीवास्तव एवं डॉ. रचना श्रीवास्तव ने भी उपस्थित होकर प्रशिक्षार्थियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में सेजल वर्मा, रिचा चौधरी, रूचि मौर्या, वर्षा, सपना पाल, महक मिश्रा, आकांक्षा सिंह, अवंतिका वर्मा, सूरज, नितेश, अंजली वर्मा, अपूर्वा वर्मा, सौम्या पाण्डेय सहित 75 से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह कला महाकुंभ 28 मई तक निरंतर जारी रहेगा।कल के सत्र में प्रतिभागी भारतीय लोक कलाओं के समकालीन स्वरूप पर चर्चा करेंगे।
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