रांची 14 मई (आरएनएस)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अंगिका, भोजपुरी और मगही को शामिल किए जाने की संभावनाओं को लेकर आदिवासी संगठनों और बुद्धिजीवियों ने तीखा विरोध जताया है। रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. वासवी किड़ो, देव कुमार धान, आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव और नारायण भगत ने इसे झारखंडी भाषा, संस्कृति और अस्मिता पर हमला बताया।
वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी और मगही हिन्दी की उपबोलियां हैं, जबकि अंगिका को 2011 की भाषा जनगणना में स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन भाषाओं को जेपीएससी परीक्षा में शामिल करने की कोशिश राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। संगठनों ने सरकार से इस मामले की मंत्रिमंडलीय जांच कराने और झारखंडी भाषाओं व आदिवासी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने की मांग की।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

