भोपाल,16 मई (आरएनएस)। शिक्षक भर्ती परीक्षा-2025 पास कर चुके अभ्यर्थियों का आंदोलन शनिवार को और उग्र हो गया। पदवृद्धि और जल्द जॉइनिंग की मांग को लेकर प्रदेशभर से बड़ी संख्या में वर्ग 2 और वर्ग 3 के अभ्यर्थी लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दोपहर की भीषण गर्मी में प्रदर्शन कर रही एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर एंबुलेंस भी पहुंची, लेकिन युवती ने अस्पताल जाने से इनकार करते हुए आंदोलन जारी रखा।
दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में अभ्यर्थी तेज धूप के बीच डीपीआई परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। पद वृद्धि और दूसरी काउंसलिंग की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी होती रही। इसी दौरान गर्मी की वजह से एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ गई।
साथी अभ्यर्थियों ने मौके पर ही उन्हें पानी, एनर्जी ड्रिंक और दवाइयां दीं, जिसके बाद उनकी हालत सामान्य हुई। महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगडऩे के बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन युवती ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अभ्यर्थियों को परिसर खाली करने की चेतावनी दी। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक बहस और हंगामे की स्थिति बनी रही। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे न्यायपूर्ण मांगों को लेकर प्रदेशभर से भोपाल पहुंचे हैं, लेकिन उन्हें परेशान किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह पहला प्रदर्शन नहीं है। नवंबर 2025 से अब तक वे 8 से 9 बार भोपाल पहुंचकर प्रदर्शन कर चुके हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम खून से आवेदन लिखा गया, भूख हड़ताल की गई, मुंडन कराया गया और विरोध स्वरूप मार्कशीट तक जलाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में बेहद कम पद घोषित किए गए हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र और परीक्षा पास अभ्यर्थी चयन से बाहर हो रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, इसके बावजूद पर्याप्त भर्ती नहीं निकाली जा रही।
अभ्यर्थियों का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग में कुल 2 लाख 89 हजार 5 स्वीकृत पदों में से करीब 1 लाख 15 हजार 678 पद खाली हैं। प्रदेश के 83 हजार 514 स्कूलों में से 1968 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि 46 हजार 417 स्कूलों में केवल दो शिक्षक कार्यरत हैं।
अभ्यार्थियों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त भर्ती नहीं निकाली जा रही।

