प्रयागराज 17 मई (आरएनएस)। जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में मुनि श्री 108 वासुपूज्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 अतुल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में संयम, संस्कार और आत्मानुशासन पर आधारित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुनि श्री वासुपूज्य सागर जी महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी मानसिक शांति से दूर होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण जीवन में संस्कारों और आत्मसंयम की कमी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व्यक्ति को केवल भौतिक उन्नति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मविकास की प्रेरणा देती है।
मुनिश्री ने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही नैतिकता, अनुशासन और बड़ों के सम्मान के संस्कार दिए जाने चाहिए। परिवारों में धार्मिक वातावरण और संस्कारों का संरक्षण ही समाज को मजबूत बना सकता है।
मुनि श्री अतुल सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में समय का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यर्थ की प्रतिस्पर्धा, दिखावा और क्रोध व्यक्ति की ऊर्जा को नष्ट करते हैं, जबकि संयम, संतोष और सकारात्मक चिंतन जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया और भौतिक आकर्षण में उलझने के बजाय अध्ययन, संस्कार और आत्मचिंतन पर ध्यान देने का आह्वान किया।
सायंकाल मंदिर परिसर में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम एवं आरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने धर्म एवं जीवन से जुड़े प्रश्न पूछे। मुनिश्री ने सहज एवं प्रेरणादायक उत्तर देकर सभी की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
हर रविवार की भांति भक्तामर स्तोत्र विधान एवं विश्व शांति के लिए शांतिधारा का आयोजन भी किया गया। आज की शांतिधारा के कर्ता परिवार श्री नेता धन कुमार जैन सपरिवार एवं अरुण जैन, मौसम जैन, राजेंद्र नगर सपरिवार रहे।
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