—- बॉर्डर पर चेकिंग, सख्ती का शोर, लेकिन अंदर सेटिंग ‘मैनेज के खेल में ट्रके धड़ल्ले से हो रही है पार।
—- करोड़ों की राजस्व चोरी में कौन-कौन है शामिल?
क्या बड़े चेहरे हो सकते है बेनकाब।
कुशीनगर, 17 मई (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर व पडोसी राज्य बिहार सीमा पर (लाल सोना) मोरंग बालू का खेल सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरा मामला सरकारी सिस्टम, पुलिसिया संरक्षण और इंट्री माफियाओं के कथित गठजोड़ की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है। ऐसी चर्चा है कि कुशीनगर में हर रात बालू से लदी सैकडों ट्रकें बिना आईएसटीपी के सीमा पार कर रही हैं। नतीजतन सार्वजनिक रूप से करोड़ों रुपये का राजस्व की चोरी हो रहा है। सवाल यह है कि जब सीमा पर सघन चेकिंग अभियान चल रहा है, तब “सेटिंग वाली गाडिय़ां” आखिर किसके इशारे पर बेरोकटोक दौड़ रही हैं? पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के एक्शन और दो पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब यह मामला सिर्फ राजस्व चोरी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले कथित भ्रष्टाचार और संरक्षण के नेटवर्क की जांच का विषय बन गया है।
बताते चलें कि लगातार मिल रही शिकायतो के बाद पिछले एक पखवाड़े से जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने राजस्व चोरी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। बहादुरपुर चौकी पर चौबीसों घंटे सघन चेकिंग की जा रही है। मगर सवाल यह है कि जब सीमा पर इतनी सख्ती है तो बिना आईएसटीपी (पास) कटाए ट्रकें तमकुही राज, सेवरही और पटहेरवा थाना क्षेत्रों तक कैसे पहुंच रही हैं? 14 मई को सीओ तमकुही राज के नेतृत्व में की गयी कार्रवाई में बिना आईएसटीपी कटाए घूम रही 10 ट्रकों को पकड़ा गया। करीब पांच लाख रुपये की राजस्व, चालान से वसूला गया और सात लोगों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ। लेकिन इस कार्रवाई ने सिस्टम की पोल खोल दी। चर्चा सरेआम होने लगी कि बार्डर पर इतना सघन जांच अभियान के बावजूद यह ट्रकें कई थाना क्षेत्रो की सीमा कैसे पार की? क्या रास्ते में इन्हें “सरकारी संरक्षण” मिलता रहा?।
इनसेट– एफआईआर में वही नाम दर्ज हुए जिनकी विभाग में है मजबूत पैठ– करीब पांच दिन पहले खनन अधिकारी की तहरीर पर तरया सुजान थाने में 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोप है कि ये लोग बिना आईएसटीपी के ट्रकों को अवैध तरीके से पास कराते थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ, वही लोग खनन विभाग के बेहद करीबी बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आरोपियों में एक ऐसा शख्स भी शामिल है, जिसे खनन अधिकारी का ” कारखास” कहा जाता है। ऐसी चर्चा जोरो पर है कि खनन अधिकारी का कारखास कहलाने वाला व्यक्ति खनन अधिकारी के कई गोपनीय राज जानता है और उसी के दम पर पूरे सिस्टम में दखल देता है। यही वजह है कि इलाके में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या एफआईआर सिर्फ दिखावे की कार्रवाई है या फिर अंदरखाने में कोई बड़ा खेल चल रहा है?।
इनसेट– ड्राइवर, मुंशी और कॉल डिटेल खोल सकती है पूरा राज– बेशक! पूरे मामले में खनन अधिकारी के चालक जितेंद्र और मुंशी सतीश की भूमिका भी चर्चा में है। जानकारों का कहना है कि यदि आरोपियों, चालक और मुंशी के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन और चैट रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे “इंट्री नेटवर्क” का काला सच सामने आ सकता है। बताया जा रहा है कि बिहार सीमा से निकलने वाली ट्रकों की “सेटिंग” पहले से तय रहती है। कौन सी गाड़ी कहां से निकलेगी, किस चौकी पर किससे बात करनी है, कौन सी गाड़ी पकड़ी जाएगी और कौन सी सुरक्षित निकलेगी, सब कुछ एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत संचालित होता है।
इनसेट– कमजोर ट्रांसपोर्टर निशाने पर, बड़े खिलाड़ी सुरक्षित– विडंबना यह है कि कार्रवाई सिर्फ कमजोर और बिना पहुंच वाले ट्रक मालिकों पर हो रही है। जिनकी विभाग और पुलिस में मजबूत पकड़ है। उनकी गाडिय़ां मुकदमे के बाद भी बेखौफ दौड़ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ है, वह आज भी थानों और विभागीय कार्यालयों में बेखौफ आते-जाते देखे जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन लोगों को संरक्षण कौन दे रहा है?।
इनसेट– एसपी का एक्शन, दो अफसर निलंबित– इस मामले मे पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बड़ा कदम उठाते हुए तरया सुजान थानाध्यक्ष राम सहाय चौहान और बहादुरपुर चौकी प्रभारी विक्रम अजित राय को देर रात निलंबित कर दिया। जिले में चर्चा है कि यह कार्रवाई बालू के अवैध खेल और कथित सेटिंगबाजी की शिकायतों के बाद हुई है। पुलिस अधीक्षक की इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि अगर जांच का दायरा बढ़ा तो कई और जिम्मेदारो के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
इनसेट– सवाल:- क्या बड़े चेहरे होंगे उजागर?– फिलहाल कुशीनगर में मोरंग लाल बालू के इस खेल ने प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे खिलाडिय़ों तक सीमित रहेगी या फिर उन बड़े चेहरों तक भी पहुंचेगी जिनके संरक्षण में यह करोड़ों का खेल वर्षों से फल-फूल रहा है? जानकारो का दावा है कि निष्पक्ष जांच हुई। मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन हिस्ट्री खंगाली गई, तो यह साफ हो जाएगा कि आखिर कौन लोग इस पूरे नेटवर्क के असली संचालक हैं और किसके शह पर सरकार के राजस्व को दोनो हाथो से लूटा जा रहा है।
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