तेहरान,18 मई। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर जारी संकट के बीच अब ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान बड़ी टेक कंपनियों से इन केबल्स के इस्तेमाल के बदले फीस लेने की तैयारी कर रहा है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने भी सोशल मीडिया पर इसका संकेत दिया है। इससे दुनिया की इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को लेकर नई चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान चाहता है कि गूगल, अमेजन और मेटा जैसी कंपनियां सबमरीन केबल इस्तेमाल करने के बदले भुगतान करें। साथ ही, केबल बिछाने वाली कंपनियों को लाइसेंस फीस भी देनी पड़ सकती है। ईरान यह भी चाहता है कि रिपेयर और मेंटेनेंस का काम सिर्फ उसकी स्थानीय कंपनियों को मिले। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह साफ नहीं है कि विदेशी कंपनियां ईरान को भुगतान कैसे करेंगी और नियमों का पालन कैसे होगा।
समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल दुनिया के इंटरनेट सिस्टम की सबसे अहम कड़ी मानी जाती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से चलता है। ये केबल भारत, खाड़ी देशों, यूरोप और एशिया को जोड़ती हैं। इनके जरिए इंटरनेट, क्लाउड सर्विस, ऑनलाइन कॉल और डिजिटल पेमेंट जैसी सेवाएं चलती हैं। होर्मुज स्ट्रेट से कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय केबल भी होकर गुजरती हैं।
अगर इन सबमरीन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो कई देशों में इंटरनेट सेवा प्रभावित हो सकती है। इससे ऑनलाइन कारोबार, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में बताया गया कि इंटरनेट की स्पीड धीमी होने या पूरी तरह बंद होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसी वजह से अब होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ तेल सप्लाई ही नहीं, बल्कि दुनिया के डिजिटल नेटवर्क के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।
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