कोटद्वार 18 मई (आरएनएस)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. गोपाल नारायण गौड़ का दुगड्डा ब्लॉक के अंतर्गत पैतृक गांव महरगांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को दो किमी. पैदल चलकर ऐता-चरेख मार्ग व उसके बाद मुख्य बाजार दुगड्डा आवाजाही करनी पड़ रही है। पैदल मार्ग भी खस्ताहाल है। ग्राम पंचायत उमरैला का राजस्व ग्राम महरगांव घने जंगल के मध्य स्थित है। 1870 में गांव की बसागत पं शीशराम गौड़ ने की थी। वो जयहरीखाल ब्लॉक के कौडिय़ा सारी के टोपियाल गांव से आकर महरगांव में बसे थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी गांव की पहचान बनाने में प्रयासरत है। वर्ष 2003 में ऐता-चरेख मार्ग निर्माण को स्वीकृति मिली और वर्ष 2010-11 में इस मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनके आग्रह पर भी मोटर मार्ग से महरगांव को नहीं जोड़ा गया। ग्रामीण ऐता के समीप खोह नदी पर निर्मित मोटर पुल से गांव तक पैदल आवाजाही करने को मजबूर हैं। पैदल रास्ते की भी स्थिति खस्ताहाल है। बरसात में पैदल आवाजाही करना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों, प्रसव वाली महिलाओं व स्कूली बच्चों को होती है। इसके अलावा पैदल आवाजाही करने में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
इस संबंध में ग्रामीण जीसी गौड़, सुरेश चंद्र गौड़, सतीश चंद्र गौड़ का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोपाल नारायण गौड़ की स्मृति में गांव के प्रवेश स्थल में स्मृति की ओर से का निर्माण किया जाना चाहिए। फरवरी 2025 में दुगड्डा में आयोजित शहीद मेले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से उनके गांव को सड़क सुविधा से जोडऩे की मांग की है।
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