ऋषिकेश 18 मई (आरएनएस)। हिमालयन हॉस्पिटल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिसमें एक महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित रखते हुए अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक लैप सैक्रोहिस्टेरोपेक्सी सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह संस्थान में इस प्रकार की यह पहली की-होल सर्जरी रही। जौलीग्रांट स्थित हिमालयन हॉस्पिटल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. प्रज्ञा खुगसाल ने बताया कि टिहरी गढ़वाल निवासी 26 वर्षीय गीता देवी लंबे समय से बच्चेदानी बाहर आने (यूटराइन प्रोलैप्स) की गंभीर समस्या से पीडि़त थीं। इस कारण उन्हें पेशाब और मल त्याग में कठिनाई के साथ-साथ दैनिक कार्यों में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई चिकित्सा केंद्रों पर कम उम्र के बावजूद उन्हें बच्चेदानी निकालने (हिस्टेरेक्टॉमी) की सलाह दी गई थी। मरीज की उम्र और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बच्चेदानी को सुरक्षित रखने वाली आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया गया। 13 मई को दूरबीन विधि से की गई, इस अत्याधुनिक सर्जरी में विशेष मेश की सहायता से बच्चेदानी को उसकी सामान्य स्थिति में मजबूती से स्थापित किया गया। साथ ही नीचे की कमजोर मांसपेशियों एवं सूजे हुए हिस्सों का सफल ईलाज किया गया। की-होल तकनीक से हुई इस सफल सर्जरी के बाद मरीज ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर सामान्य रूप से चलने-फिरने लगीं और सामान्य भोजन लेने लगीं। ऑपरेशन के दौरान अथवा बाद में किसी प्रकार की कोई जटिलता सामने नहीं आई।इस जटिल सर्जरी में डॉ. आकांक्षा देशवाली, डॉ. अंजली सोनकर, डॉ. निशिता ने सर्जिकल टीम में सहयोग दिया। एनेस्थीसिया से डॉ. कृति बिंदल व ममता ने योगदान दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिरा नौटियाल के मार्गदर्शन ने इस उपलब्धि को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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