सिरसा 20 मई (आरएनएस)। विश्व भर में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उच्च रक्त चाप दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य नागरिकों को उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूक करना है। होली नर्सिंग होम के संचालक डा. वीपी गोयल ने बताया कि 75 साल की आजादी में हम अभी भी उच्च रक्तचाप के बारे में जानकारी विदेश से ही लेते हैं। जबकि सच्चाई यह है की विदेशी आंकड़े हम भारतीयों पर शत प्रतिशत लागू नहीं होते हंै। मिसाल के तौर पर विदेशी लिपिड प्रोफाइल के पैरामीटर हाई एल. डी. एल हमारे लागू नहीं होता है। उन्होंने बताया कि भारतीयों के जींस के अनुरूप हमारे नागरिकों में कोलेस्ट्रॉल व बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड ज्यादा मायने रखते हैं। मतलब यह है कि हमें लिपिड प्रोफाइल में एलडीएल नॉर्मल होते हुए भी हाई ट्राइग्लिसराइड को टारगेट करना है, जबकि यूरोप में हाई एलडीएल ज्यादा पाया जाता है। इसी तरीके से प्रचलित बॉडी मास इंडेक्स यानी बी एम आई भारतीयों में लागू नहीं होती है, क्योंकि पश्चिम की अपेक्षा हमारा कद छोटा व पेट बढ़े हुए होते हैं। जिसके लिए वेस्ट हिप रेशो ज्यादा तर्क संगत है। हमारे यहां नॉर्मल बीएमआई होते हुए भी यदि वेस्ट हिप रेशो ज्यादा है तो दिल व दिमाग के अटैक का खतरा बना रहता है। इसी तरीके से पश्चिम की अपेक्षा हमारा खान पान, रहन-सहन की जीवन शैली अलग है। इसलिए हमारे यहां प्रचलित हैं एचबीए-1 सी भी शत-प्रतिशत लागू नहीं होती है। इसलिए जरूरत है कि हम भारत में रहते हुए भारत वासियों के लिए उचित शारीरिक रक्त आदि के मापदंड निर्धारित करें। मेरा मानना ही है कि हम पश्चिमी सभ्यता की अंधा धुंध नकल करने की बजाय हमारे नागरिकों में ट्राइग्लिसराइड कोलेस्ट्रॉल वेस्ट हिप रेशों आदि पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करें। हमें अपने खान पान में फास्ट फूड, घी, शराब तंबाकू को बंद करना चाहिए। नियमित 30 से 45 मिनट की सैर, प्राणायाम, योग या व्यायाम करना चाहिए, ताकि हम स्वस्थ जीवन जी सकें।
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